
दोस्तों, हर पंप पर मशीनें प्रोग्राम्ड होती हैं। वो पहले से 100, 200, 500 जैसे राउंड फिगर के अलावा 110, 210, 510 के बटन सेट रखती हैं। पंप वाला बस बटन दबाता है, और सटीक रकम का तेल आ जाता है। ये तेज काम करता है – कस्टमर इंतजार नहीं करता, बिजनेस चलता रहता है। लेकिन कईयों को लगता है, ‘अरे, 10 रुपये एक्स्ट्रा क्यों?’ शक होता है ठगी का। हकीकत में ये सुविधा है!
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क्यों लगता है ठगी हो रही है?
हम सबको डर लगता है ना पंप वालों से। पुरानी खबरें सुनते हैं – मीटर गड़बड़, कम तेल। तो 100 बोलो तो 110 भरवाते हैं, लगता है चूना लगा रहे। लेकिन भाई, मशीन रेट के हिसाब से ही काम करती है। आजकल GPS ट्रै킹 और कैमरे होते हैं, UIDAI जैसी निगरानी नहीं तो OIL कंपनियों की होती है। फिर भी शक है? तो लीटर में मांगो – 10 लीटर बोलो, सही मिलेगा। रुपये में बोलने से कन्फ्यूजन होता है।
मशीन कैसे काम करती है?
पेट्रोल पंप की मशीन सॉफ्टवेयर से चलती है। तेल का रेट (जैसे 100 रुपये प्रति लीटर) पहले से फीड होता है। आप 110 रुपये बोलते हो, तो मशीन कैलकुलेट कर 1.10 लीटर देती है। बटन प्री-सेट होते हैं ताकि गलती न हो। नया पंप हो तो टचस्क्रीन, पुराना हो तो मैकेनिकल। दोनों में सटीकता एक जैसी। कंपनियां रेगुलर चेक करती हैं, तो धांधली मुश्किल। बस, साफ रहता है तो परफेक्ट।
सही तरीके से तेल भरवाएं
ठीक है, शक दूर? अब सेफ तरीका बताता हूं। पहला, लीटर में बोलो – ’10 लीटर डीजल दो’। रुपये मत बोलो, वरना छोटा-मोटा अंतर लग सकता है। दूसरा, मीटर जीरो चेक करो भरने से पहले। तीसरा, रसीद लो हमेशा – प्रूफ बनेगा। चौथा, भीड़भाड़ वाले पंप अवॉइड करो, सुबह-शाम जाओ। और हां, ऐप्स जैसे MyPetrolPump से पास के रेट चेक करो। ये आदतें ठगी से बचाएंगी।
ठगी की शिकायत कैसे करें?
अगर सच में मीटर धोखा दे, तो घबराओ मत। पंप का लाइसेंस नंबर नोट करो। Legal Metrology डिपार्टमेंट को कॉल करो – टोल-फ्री 1800-180-1514। या ऑनलाइन कम्प्लेंट ऐप पर डालो। OIL कंपनियां (IOCL, BPCL) का हेल्पलाइन भी है। जांच होगी, जुर्माना लगेगा पंप को। कई केसों में तुरंत ठीक हो जाता है। जागरूक रहो, तो कोई हेरा-फेरी नहीं।
















