Join Youtube

Dollar vs BRICS: क्या खत्म हो जाएगा डॉलर का राज? भारत-रूस के नए ‘डिजिटल पेमेंट’ सिस्टम ने उड़ाई पश्चिमी देशों की नींद।

ब्रिक्स (BRICS) देशों, विशेष रूप से भारत और रुस द्वारा विकसित किया जा रहा नया डिजिटल पेमेंट सिस्टम डॉलर के वैश्विक वर्चस्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आगामी 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (जिसकी मेजबानी भारत करेगा) के एजेंडे में ब्रिक्स देशों की डिजिटल मुद्राओं (CBDCs) को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव रखा है

Published On:
Dollar vs BRICS: क्या खत्म हो जाएगा डॉलर का राज? भारत-रूस के नए 'डिजिटल पेमेंट' सिस्टम ने उड़ाई पश्चिमी देशों की नींद।
Dollar vs BRICS: क्या खत्म हो जाएगा डॉलर का राज? भारत-रूस के नए ‘डिजिटल पेमेंट’ सिस्टम ने उड़ाई पश्चिमी देशों की नींद।

ब्रिक्स (BRICS) देशों, विशेष रूप से भारत और रुस द्वारा विकसित किया जा रहा नया डिजिटल पेमेंट सिस्टम डॉलर के वैश्विक वर्चस्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आगामी 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (जिसकी मेजबानी भारत करेगा) के एजेंडे में ब्रिक्स देशों की डिजिटल मुद्राओं (CBDCs) को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। 

यह भी देखें: PAN Card खो गया या चोरी हुआ? ऑनलाइन रीप्रिंट करने का तरीका जानें, आसान कदम

क्या डॉलर का राज खत्म हो जाएगा?

हालांकि अमेरिकी डॉलर अभी भी दुनिया के लगभग 59% विदेशी मुद्रा भंडार और 58% अंतरराष्ट्रीय भुगतानों पर नियंत्रण रखता है, लेकिन इसमें गिरावट के संकेत मिल रहे हैं। 

  • डॉलर की हिस्सेदारी में कमी: ब्रिक्स देशों के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी 2024 के 58.2% से घटकर 2026 की शुरुआत में लगभग 56.92% रह गई है।
  • बाजार में हलचल: वैश्विक स्तर पर ऋण का बड़ा हिस्सा डॉलर में होने के बावजूद, अमेरिकी नीति और राजनीतिक अस्थिरता के कारण दुनिया अब विकल्पों की तलाश कर रही है। 

भारत-रूस के नए सिस्टम की मुख्य विशेषताएं

यह प्रणाली एक साझा ‘पेमेंट रेल’ पर आधारित है जो सदस्य देशों की डिजिटल मुद्राओं को सीधे जोड़ेगी, इसमें भारत का e-Rupee, रूस का Digital Ruble, और चीन का e-Yuan शामिल हैं। 

  • यह नया सिस्टम पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले SWIFT नेटवर्क के बिना व्यापार की अनुमति देगा, जिससे पश्चिमी प्रतिबंधों (Sanctions) का डर खत्म हो जाएगा।
  • डॉलर को ‘बिचौलिया’ मुद्रा के रूप में हटाने से लेनदेन की लागत (जो वर्तमान में 3-5% है) कम होगी और भुगतान कुछ ही सेकंड में संभव होगा।
  • इस प्रणाली में केवल देशों के बीच के व्यापार का ‘नेट’ अंतर ही स्थानांतरित होगा, जिससे मुद्रा परिवर्तन का अनावश्यक खर्च बचेगा। 

यह भी देखें: RRB Group D Vacancy 2026: 22,000 रेलवे ग्रुप D पदों के लिए नया नोटिफिकेशन जारी, जल्दी करें आवेदन

पश्चिमी देशों और अमेरिका की चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ब्रिक्स के इन प्रयासों को “अमेरिकी विरोधी” करार दिया है और ब्रिक्स देशों पर 100% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है, पश्चिमी देशों की चिंता का मुख्य कारण यह है कि यदि यह सिस्टम सफल होता है, तो वे डॉलर को आर्थिक हथियार (Economic Weapon) के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे

Dollar vs BRICS
Author
info@gurukulbharti.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार