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यूपी के 68 हजार कर्मियों की फरवरी की सैलरी अटकी! संपत्ति का ब्योरा छिपाना पड़ा भारी; योगी सरकार ने दिखाया सख्त तेवर।

यूपी के 68 हजार कर्मचारियों की फरवरी सैलरी अटक गई! संपत्ति का ब्योरा छिपाने का खामियाजा भुगत रहे। योगी सरकार ने सख्त कार्रवाई कर दी अब तक लाखों रुपये लटके! क्या आपका भविष्य खतरे में? पूरी डिटेल्स जानें, बचाव के टिप्स भी!

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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को एक बार फिर सख्ती से लागू किया है। राज्य के कुल 8,66,261 सरकारी कर्मचारियों में से 68,236 कर्मचारियों की जनवरी 2026 की सैलरी फरवरी में रोक दी गई है। कारण साफ है मानव संपदा पोर्टल पर 31 जनवरी तक चल-अचल संपत्ति का अनिवार्य ब्योरा न अपलोड करना। इस फैसले ने सरकारी दफ्तरों में हड़कंप मचा दिया है, जहां निचले स्तर के क्लर्क से लेकर वरिष्ठ अधिकारी तक चिंता में डूबे हैं।

यूपी के 68 हजार कर्मियों की फरवरी की सैलरी अटकी! संपत्ति का ब्योरा छिपाना पड़ा भारी; योगी सरकार ने दिखाया सख्त तेवर।

पारदर्शिता की इस जंग का पूरा कच्चा चिट्ठा

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी विभागाध्यक्षों को बार-बार निर्देश दिए थे। 31 दिसंबर 2025 तक अर्जित हर संपत्ति जमीन, मकान, वाहन या अन्य का विवरण ऑनलाइन दर्ज करने का अल्टीमेटम था। सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के नियम-24 के तहत यह पारदर्शिता सुनिश्चित करने का कदम है। समयसीमा गुजरते ही वेतन प्रक्रिया फ्रीज। अब कर्मचारी ब्योरा जमा करेंगे तभी पैसे हाथ आएंगे। ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध सीएम योगी की यह मुहिम भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

श्रेणीवार लापरवाही

लापरवाही हर जगह फैली हुई है, तृतीय श्रेणी (लिपिक, कनिष्ठ सहायक) के 34,926 कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें व्यस्तता का बहाना सूझ सकता है। चतुर्थ श्रेणी (क्लर्क, चपरासी) के 22,624 लोग भी लापता। प्रथम श्रेणी (IAS, PCS जैसे वरिष्ठ अधिकारी) के 2,628 और द्वितीय श्रेणी के 7,204 कर्मचारियों की संख्या सवाल उठाती है कि आखिर अधिकारी क्यों पीछे रहे। अन्य श्रेणी में 854 लोग शामिल। कुल मिलाकर 7.9 प्रतिशत कर्मचारी इस जाल में फंसे।

श्रेणीप्रभावित संख्यामुख्य पदों के उदाहरण
प्रथम श्रेणी2,628IAS, PCS अधिकारी
द्वितीय श्रेणी7,204मध्यम स्तर के अधिकारी
तृतीय श्रेणी34,926लिपिक, सहायक
चतुर्थ श्रेणी22,624क्लर्क, चपरासी
अन्य854विविध पद
कुल68,236

इन विभागों की चिंता बढ़ी!

लोक निर्माण, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और पुलिस जैसे प्रमुख विभागों में हाहाकार मचा है। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी के दफ्तरों में कर्मचारी संगठन सक्रिय हो गए हैं। कई जगह तकनीकी खराबी या छुट्टियों का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन सरकार का रुख अडिग है पारदर्शिता पहले। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां कर्मचारी अपनी मजबूरी बयां कर रहे।

कर्मचारी आक्रोश और सरकार का कड़ा संदेश

यूनियनें चिल्ला रही हैं कि पोर्टल पर दिक्कतें थीं, जागरूकता कम थी। लेकिन प्रशासन का जवाब तल्ख: देरी पर विभागीय जांच, चार्जशीट और अनुशासनिक कार्रवाई तय। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह शुरुआत मात्र है। अगले चक्र में और सख्ती होगी।” पिछले साल भी इसी पोर्टल पर सैकड़ों मामलों की जांच हुई थी, जो भ्रष्टाचार के पर्दाफाश का सबूत हैं।

आगे की राह

ब्योरा जमा होते ही सैलरी रिलीज का वादा है, लेकिन लंबे टालमटोल पर एक्शन अवश्यंभावी। क्या यह फैसला हर कर्मचारी को पारदर्शिता का पाठ पढ़ाएगा? या यूनियनें सड़कों पर उतर आएंगी? फिलहाल योगी सरकार ने सख्त तेवर दिखाकर स्पष्ट संदेश दे दिया भ्रष्टाचार के प्रति कोई ढील नहीं। यूपी का प्रशासनिक परिदृश्य अब बदलने की कगार पर है।

Author
info@gurukulbharti.in

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