
भारत में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आ गया है। अब यदि किसी बच्चे का जन्म एक साल से अधिक पुराना हो चुका है, तो प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) की अनुमति जरूरी होगी। पहले यह काम केवल ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) के आदेश पर हो जाता था, लेकिन फर्जी दस्तावेजों और गड़बड़ी की शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। पटना के डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने सभी रजिस्ट्रारों और SDM को निर्देश जारी करते हुए कहा कि यह बदलाव प्रमाण पत्र प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
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क्या है नई निति?
पहले 21 दिनों के भीतर जन्म दर्ज करना सरल था, लेकिन देरी होने पर स्थानीय स्तर पर मंजूरी पर्याप्त मानी जाती थी। नई नीति के तहत शहरी क्षेत्रों में सहायक या प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में पंचायत सचिव यह जिम्मेदारी निभाएंगे।
पटना डीएम ने स्पष्ट किया कि 21 दिनों के अंदर जन्म या मृत्यु का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए हरी झंडी वाले क्षेत्रों (शहरी) में प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी को आवेदन देना होगा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिव के पास जमा करना होगा। यदि जन्म एक महीने से अधिक पुराना है, तो गांव में प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी प्रमाण पत्र जारी करेंगे, लेकिन शहरों में एक साल बाद SDM का आदेश अनिवार्य है।
समयसीमा के अनुसार प्रक्रिया
- 21 दिनों के भीतर: कोई अतिरिक्त मंजूरी नहीं। ऑनलाइन पोर्टल crsorgi.gov.in या स्थानीय रजिस्ट्रार कार्यालय में सीधे आवेदन करें।
- 21 दिन से 1 साल: जिला रजिस्ट्रार की अनुमति और नाममात्र शुल्क।
- 1 साल बाद: SDM से परमिशन लें। इसके लिए हलफनामा, दो गवाहों के बयान, अस्पताल स्लिप, आंगनवाड़ी रिकॉर्ड या स्कूल प्रमाणपत्र जैसे सबूत जरूरी। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 30 दिन बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट, FIR कॉपी या कोर्ट ऑर्डर चाहिए।
जरूरी दस्तावेजों की सूची
| दस्तावेज प्रकार | विवरण |
|---|---|
| पहचान प्रमाण | आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या सर्विस बुक (अभिभावकों की) |
| जन्म सबूत | अस्पताल/डॉक्टर रिपोर्ट, सेविका पंजी, टीकाकरण कार्ड |
| गवाह प्रमाण | दो स्थानीय निवासियों के शपथ-पत्र |
| देरी कारण | स्पष्टीकरण हलफनामा और पुराने रिकॉर्ड (स्कूल आदि) |
यह बदलाव न केवल जन्म प्रमाण पत्र पर लागू होता है, बल्कि मृत्यु प्रमाण पत्र पर भी असर डालता है। उदाहरण के लिए, यदि गांव में बच्चे का जन्म एक महीने से ज्यादा हो गया, तो प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सीधे जारी करेंगे, लेकिन शहरी क्षेत्रों में एक साल बाद SDM ऑर्डर के बिना कोई राहत नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधार से लिंकिंग और डिजिटल वेरिफिकेशन पर जोर देकर डेटा की सटीकता सुनिश्चित होगी।
प्रभाव और चुनौतियां
ये नियम स्कूल एडमिशन, पासपोर्ट आवेदन, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़े हैं। देरी से हजारों अभिभावक परेशान हो सकते हैं, खासकर ग्रामीण बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां जागरूकता कम है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हालिया फैसले में SDM के असीमित सत्यापन अधिकार पर सवाल उठाए हैं, कहा कि जन्म-मृत्यु तिथि सत्यापन का कानूनी अधिकार SDM को नहीं है और जरूरत पर पंजीकरण अनिवार्य होना चाहिए। फिर भी, सुप्रीम कोर्ट के 1 फरवरी 2026 के फैसले ने इन नियमों को मजबूती दी है।
नवजात के जन्म के तुरंत बाद प्रमाण पत्र बनवाएं। देरी होने पर SDM कार्यालय जाएं और सभी दस्तावेज संपूर्ण रखें। ऑनलाइन पोर्टल पर ट्रैकिंग सुविधा उपलब्ध है। सरकार ने जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, ताकि आमजन को परेशानी न हो। यह कदम लंबे समय में फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाएगा और डिजिटल इंडिया को मजबूत करेगा।
















