गर्मी का मौसम आते ही हर घर में AC खरीदने की चर्चा जोरों पर है। लेकिन पोर्टेबल और विंडो AC के बीच का फर्क समझे बिना खरीदारी करना महंगा पड़ सकता है। कूलिंग से लेकर बिजली बिल तक हर मोर्चे पर ये दोनों अलग-अलग चुनौतियां पेश करते हैं। आइए जानते हैं इनकी बारीकियां, ताकि आपका फैसला सही हो।

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काम करने का तरीका
विंडो AC एक ही बॉडी में सब कुछ समेटे रहता है। इसे खिडकी या दीवार में फिट कर एक जगह स्थायी रूप से लगा देते हैं। ये मध्यम आकार के कमरों को तेजी से ठंडा करता है। वहीं पोर्टेबल AC को जमीन पर रखा जाता है। इसकी पीछे की गर्म हवा को बाहर निकालने के लिए पाइप खिडकी से गुजारा जाता है। इसकी खासियत ये है कि इसे एक कमरे से दूसरे में आसानी से ले जाया जा सकता है।
कूलिंग की ताकत
विंडो AC बड़े स्पेस को बेहतर तरीके से संभालता है। 10×12 फुट के बेडरूम में ये चिल्ड हवा का तूफान ला देता है। पोर्टेबल छोटे कमरों के लिए ठीक रहता है, लेकिन ज्यादा गर्मी या हवा के आने-जाने वाले जगहों पर कमजोर पड़ जाता है। दरवाजा बार-बार खुलने पर इसका असर और घट जाता है।
बिजली बिल का खेल
यहां असली फर्क दिखता है। एक ही क्षमता वाले दोनों में विंडो कम बिजली खाता है। पोर्टेबल में पाइप से हवा लीक होने या कम कूलिंग के चलते मशीन ज्यादा देर चलनी पड़ती है। नतीजा, बिल में इजाफा। रोज 8 घंटे इस्तेमाल करने पर सालाना हजारों का फासला बन सकता है।
फिटिंग और रखरखाव
विंडो लगाने के लिए मजबूत खिडकी चाहिए। कटाई-पोताई का खर्चा अलग। किरायेदारों को इससे परहेज करना चाहिए। पोर्टेबल प्लग इन करके चला सकते हैं, लेकिन इसमें पानी जमा होने वाली टंकी को बार-बार खाली करना पड़ता है। पाइप की सीलिंग ढीली हुई तो गर्मी वापस आ जाती है। दोनों में शोर तो होता ही है, पर पोर्टेबल का कंप्रेसर कमरे के अंदर होने से रात में ज्यादा परेशानी।
खरीदारी का हिसाब
शुरुआत में पोर्टेबल सस्ता लगता है, लेकिन लंबे समय में विंडो फायदेमंद। रखरखाव में भी पोर्टेबल ज्यादा मेहनत मांगता है।
आपके लिए सही चॉइस
अपने घर में एक निश्चित कमरा ठंडा करना हो तो विंडो चुनें। किराये के मकान या कई कमरों में घुमाना हो तो पोर्टेबल बेहतर। कमरे का आकार नापें, स्टार रेटिंग देखें और ब्रांड पर भरोसा करें। गर्मी से पहले सही कदम उठाएं, वरना बिल भी गर्मी की तरह चुभेगा।
















