
बिहार सरकार ने ईंधन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बिहार भवन उपविधि 2014 (संशोधित 2025) के तहत पेट्रोल पंप और CNG स्टेशन खोलने के नियमों में महत्वपूर्ण ढील दी गई है। अब छोटे भूखंडों वाले निवेशक भी इस लाभकारी क्षेत्र में कूद सकते हैं। घनी आबादी वाले शहरों में ईंधन की किल्लत को दूर करने का यह प्रयास राज्य की आर्थिक वृद्धि को नई गति देगा।
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जमीन और सुरक्षा नियमों में ढील
पहले शहरी क्षेत्रों में पेट्रोल पंप या CNG स्टेशन के लिए न्यूनतम 30 मीटर लंबाई x 20 मीटर चौड़ाई (600 वर्ग मीटर) जमीन जरूरी थी, जो छोटे प्लॉट मालिकों के लिए असंभव था। लेकिन अब इसे घटाकर महज 20 मीटर x 20 मीटर (400 वर्ग मीटर) कर दिया गया है। इससे पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर जैसे शहरों में जगह की तंगी दूर हो जाएगी। इसी तरह, पंप के अंदर आने-जाने वाले प्रवेश मार्ग की चौड़ाई 9 मीटर से कम होकर 7.5 मीटर रह गई है। सुरक्षा बफर स्ट्रिप, जो पहले 12 मीटर लंबी होती थी, अब सिर्फ 5 मीटर की हो गई है। ये बदलाव निवेश को सस्ता और व्यावहारिक बनाते हैं।
CNG विस्तार और रोजगार सृजन
इस नीति का मुख्य लक्ष्य राज्य भर में ईंधन सुविधाओं का विस्तार है। बिहार अर्बन गैस डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी 2025 के तहत 650 नए CNG स्टेशन स्थापित करने का प्लान है। CNG को बढ़ावा देकर प्रदूषण कम करने और वाहनों के लिए सस्ता ईंधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में भी ये नियम लागू होंगे, लेकिन शहरी फोकस अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और युवा उद्यमी आकर्षित होंगे।
अनिवार्य सुविधाएं
सुविधाओं के मामले में भी सख्ती बरती गई है। हर पंप पर पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग इंडियन और वेस्टर्न शौचालय अनिवार्य हैं। स्वच्छता बनाए रखना जरूरी होगा, वरना लाइसेंस निलंबन की चेतावनी है। यह बदलाव ग्राहक सुविधा और महिला सुरक्षा को ध्यान में रखकर लाया गया है। इसके अलावा, फायर सेफ्टी, पर्यावरण क्लियरेंस और ट्रैफिक मैनेजमेंट के मानक वही रहेंगे।
आवेदन प्रक्रिया
आवेदन प्रक्रिया सरल है। इच्छुक व्यक्ति बिहार भवन निर्माण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। पहले NOC लें, फिर IOCL, BPCL या HPCL जैसी कंपनियों को डीलरशिप आवेदन जमा करें। जरूरी दस्तावेजों में लैंड डीड, साइट प्लान, फायर NOC, प्रदूषण बोर्ड मंजूरी और निवेश प्रमाण शामिल हैं। साइट इंस्पेक्शन के बाद 3-6 महीने में लाइसेंस मिल सकता है। CNG के लिए GAIL जैसे गैस सप्लायर से टाई-अप जरूरी है। निवेश ₹50 लाख से ₹2 करोड़ तक का अनुमान है, जिसमें जमीन, इक्विपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
भविष्य की संभावनाएं
यह बदलाव बिहार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा। छोटे व्यापारियों को सशक्त बनाते हुए राज्य CNG हब बन सकता है। लेकिन सफलता के लिए पारदर्शी आवंटन और नियमों का कड़ाई से पालन जरूरी है। क्या आपके जिले में पेट्रोल पंप खोलने का प्लान है? दस्तावेजों की पूरी लिस्ट के लिए विभागीय पोर्टल चेक करें। बिहार अब ईंधन व्यवसाय के नए युग में प्रवेश कर चुका है!
















