
भारत सरकार और राज्य सरकारें मिलकर किसानों को खेती को आधुनिक बनाने के लिए कृषि यंत्रों पर 20% से 80% तक की भारी सब्सिडी दे रही हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना के तहत उपलब्ध है, जो छोटे-मोटे किसानों को सस्ते में ट्रैक्टर से लेकर हल तक सभी मशीनें दिलाने का लक्ष्य रखती है। पहले दी गई जानकारी और नई डिटेल्स के आधार पर, यह योजना लाखों किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, क्योंकि खेती की लागत घटाकर उत्पादकता बढ़ाने का समय आ गया है।
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भारत के छोटे किसानों की चुनौतियां
भारत में 86% से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास महंगी मशीनें खरीदने की क्षमता नहीं। SMAM योजना इसी कमी को पूरा करती है। केंद्र सरकार ने 2026 के बजट में कृषि यंत्रीकरण के लिए 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जबकि राज्य स्तर पर भी पोर्टल सक्रिय हैं। ट्रैक्टर पर 20-50% सब्सिडी (अधिकतम 2 लाख तक) मिल रही है, जो 40-50 एचपी वाले मॉडल्स के लिए खासतौर पर फायदेमंद है।
उदाहरणस्वरूप, बाजार में 5 लाख का ट्रैक्टर सब्सिडी के बाद सिर्फ 3-3.5 लाख में घर लाया जा सकता है। इसी तरह, रोटावेटर, पावर टिलर, सुपर सीडर, हल और पंपिंग मशीनों पर 40-80% छूट है। एक 25,000 रुपये का स्प्रेयर महज 5,000-7,000 में उपलब्ध हो जाता है।
राज्यवार सब्सिडी पोर्टल आवेदन प्रक्रिया
राज्यवार भिन्नताएं भी रोचक हैं। उत्तर प्रदेश में e-khetiyantra.up.gov.in पोर्टल पर टोकन मनी 2,500 रुपये जमा कर आवेदन होता है, जो लॉटरी से चयनित किसानों को समायोजित हो जाती है। मध्य प्रदेश का ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल और गुजरात का i-Khedut Portal भी इसी तरह काम करते हैं। राजस्थान के Raj Kisan Saathi पर SC/ST किसानों को अतिरिक्त कोटा मिलता है। केंद्रीय AgriMachinery DBT Portal (agrimachinery.nic.in) सभी राज्यों के लिए एकीकृत है, जहां DBT से सीधी सब्सिडी खाते में आती है। फरवरी 2026 तक ज्यादातर पोर्टल खुले हैं, लेकिन ‘पहले आओ-पहले पाओ’ आधार पर जल्द आवेदन जरूरी।
आवश्यक दस्तावेज और चयन प्रक्रिया
आवेदन प्रक्रिया सरल लेकिन दस्तावेज पूरे रखें। आधार कार्ड (मोबाइल लिंक्ड), जमीन के कागजात (खसरा-खतौनी), बैंक पासबुक, फोटो और जाति प्रमाण-पत्र (आरक्षित वर्ग के लिए) अपलोड करें। ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद SMS अलर्ट मिलता है। चयनित किसानों को ट्रेनिंग और डेमो भी मुफ्त। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मजदूरी पर निर्भरता 40% कम हो जाएगी, बुआई-कटाई तेज होगी और फसल नुकसान घटेगा।
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
हालांकि चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी से कई किसान वंचित रह जाते हैं। कृषि विभाग को जागरूकता कैंप लगाने चाहिए। फिर भी, 2026 में 1 करोड़ किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य प्रगति पर है। यदि आप उत्तर प्रदेश या मध्य प्रदेश से हैं, तो आज ही pmkisan.gov.in या राज्य पोर्टल चेक करें। आखिरी तारीखें राज्यवार अलग हैं- उदाहरण के लिए, यूपी में 28 फरवरी तक।
















