
सरकारी नौकरियों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले तक, एक ऐसा दस्तावेज है जिसके बिना आपका आवेदन अधूरा माना जा सकता है—वह है ‘डोमिसाइल सर्टिफिकेट’ (मूल निवास प्रमाण पत्र) यह प्रमाण पत्र न केवल आपकी पहचान का हिस्सा है, बल्कि राज्य सरकार की विशिष्ट योजनाओं, छात्रवृत्ति और आरक्षण का लाभ उठाने के लिए भी अनिवार्य है।
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क्यों जरूरी है डोमिसाइल सर्टिफिकेट?
डोमिसाइल सर्टिफिकेट इस बात का कानूनी प्रमाण है कि आप किसी विशेष राज्य के स्थायी निवासी हैं। इसकी सबसे ज्यादा जरूरत इन कामों में पड़ती है:
- शिक्षा: मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य कॉलेजों में ‘स्टेट कोटा’ सीटों पर एडमिशन के लिए।
- रोजगार: राज्य सरकार की नौकरियों में स्थानीय उम्मीदवारों को मिलने वाली प्राथमिकता और आरक्षण के लिए।
- सरकारी योजनाएं: राज्य विशेष की कल्याणकारी योजनाओं और स्कॉलरशिप का लाभ लेने के लिए।
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घर बैठे ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
डिजिटल इंडिया के दौर में अब आपको सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, आप अपने राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के जरिए आसानी से आवेदन कर सकते हैं:
- सबसे पहले अपने राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट या राजस्व विभाग की वेबसाइट पर जाएं।
- ‘न्यू यूजर’ के रूप में खुद को रजिस्टर करें और लॉगिन आईडी बनाएं।
- ‘Services’ सेक्शन में जाकर ‘Domicile Certificate’ या ‘निवास प्रमाण पत्र’ के विकल्प पर क्लिक करें।
- आवेदन फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी, स्थायी पता और निवास की अवधि सही-सही भरें।
- मांगे गए दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें और यदि लागू हो, तो ऑनलाइन शुल्क (आमतौर पर ₹10-₹100) का भुगतान करें।
- फॉर्म सबमिट करने के बाद प्राप्त पावती संख्या (Acknowledgment Number) संभाल कर रखें, जिससे आप अपने आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकें।
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इन दस्तावेजों को रखें तैयार
सफलतापूर्वक आवेदन के लिए आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए:
- पहचान का प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, या वोटर आईडी।
- निवास का प्रमाण: बिजली/पानी का बिल, राशन कार्ड या प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद।
- जन्म/शिक्षा प्रमाण: जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट।
- शपथ पत्र (Affidavit): तहसील या कोर्ट द्वारा प्रमाणित स्व-घोषणा पत्र।
निवास की समय सीमा हर राज्य में अलग-अलग हो सकती है, उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में 15 वर्ष और दिल्ली में 3 वर्ष का निवास अनिवार्य है।
















