ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार का शानदार रास्ता खोल रही है डेयरी फार्मिंग लोन योजना। गाय-भैंस पालकर छोटे स्तर से शुरू करें बिजनेस और सरकार की मदद से बड़ा मुकाम हासिल करें। यह मौका बेरोजगार युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए खास तौर पर फायदेमंद साबित हो रहा है।

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योजना का उद्देश्य
सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के मकसद से यह लोन मुहैया करा रही है। छोटे डेयरी यूनिट्स स्थापित करने वालों को प्राथमिकता मिलती है। इससे न सिर्फ आय बढ़ती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। शुरू में 4-10 पशुओं से काम चलाएं और धीरे-धीरे विस्तार करें।
लोन की राशि और सब्सिडी
10 लाख से लेकर 40 लाख रुपये तक का लोन आसानी से उपलब्ध है। सामान्य श्रेणी के लिए 25 फीसदी और एससी-एसटी वर्ग को 33 फीसदी तक सब्सिडी का लाभ। ब्याज दरें 4 से 7 फीसदी तक कम रखी गई हैं, जो बैंक के हिसाब से थोड़ी बदल सकती हैं। बड़े प्रोजेक्ट्स में 42 लाख तक की मदद संभव है। यह सुविधा नाबार्ड के सहयोग से चल रही योजनाओं पर आधारित है।
पात्रता के मानदंड
ग्रामीण क्षेत्र के निवासी, बेरोजगार युवा या छोटे किसान आसानी से आवेदन कर सकते हैं। न्यूनतम आयु 18 वर्ष और जमीन का छोटा प्लॉट होना जरूरी। महिला उद्यमियों को अतिरिक्त छूट। कोई पूर्व पशुपालन अनुभव न होने पर भी चिंता न करें, प्रशिक्षण की व्यवस्था भी है।
जरूरी दस्तावेज
आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण, जमीन के कागजात और आय प्रमाण-पत्र तैयार रखें। पशु खरीद का प्रस्तावित प्लान भी जोड़ें। प्रोजेक्ट रिपोर्ट में खर्च का ब्योरा दें, जैसे पशु मूल्य, चारा व्यवस्था और शेड निर्माण।
आवेदन की प्रक्रिया
नजदीकी बैंक शाखा जैसे एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा या यूनियन बैंक में जाएं। फॉर्म भरें और दस्तावेज जमा करें। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी अप्लाई करें। 15-30 दिनों में स्वीकृति मिल जाती है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट को मजबूत बनाएं ताकि जल्दी मंजूरी मिले। सब्सिडी के लिए अलग से राज्य पशुपालन विभाग से संपर्क करें।
बिजनेस टिप्स
शुरुआत में हाई-मिल्क यील्ड वाली नस्लें चुनें। दूध बिक्री के लिए कोऑपरेटिव सोसाइटियों से जुड़ें। चारा उत्पादन खुद करें ताकि खर्च कम हो। हाई-टेक शेड और कोल्ड स्टोरेज लगाएं। बाजार लिंकेज मजबूत रखें। सालाना लाखों की कमाई का लक्ष्य रखें।
संभावित कमाई
एक पशु से रोज 10-15 लीटर दूध मिले तो मासिक 30-50 हजार का मुनाफा। 10 पशुओं पर लाखों की आमदनी। सरकारी योजनाओं से जोखिम कम। नियमित टीकाकरण और स्वच्छता पर ध्यान दें।
















