
भारत में कई ऐतिहासिक और खूबसूरत रेलवे स्टेशन हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन कौन सा है? यह रेलवे स्टेशन न सिर्फ भारत बल्कि एशिया के भी सबसे ऊंचे रेलवे स्टेशनों में गिना जाता है। अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, ठंडे मौसम और पहाड़ी वादियों के बीच स्थित होने के कारण यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में स्थित घुम रेलवे स्टेशन (Ghum Railway Station) की, जो अपनी ऊंचाई और विरासत के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
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समुद्र तल से 5068 मीटर की ऊंचाई पर स्थित
घुम रेलवे स्टेशन समुद्र तल से करीब 5068 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यही वजह है कि इसे भारत का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन माना जाता है। ऊंचे पठारी इलाके में बसा यह स्टेशन बादलों के बीच खड़ा नजर आता है, जिससे यहां का नजारा बेहद मनमोहक हो जाता है। सर्दियों के मौसम में जब यहां हल्की बर्फबारी होती है, तब पूरा इलाका सफेद चादर में ढक जाता है। इस दौरान यहां का दृश्य किसी पोस्टकार्ड या फिल्मी सीन से कम नहीं लगता। यही कारण है कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
1881 में हुआ था निर्माण
घुम रेलवे स्टेशन का निर्माण साल 1881 में किया गया था। यह स्टेशन ऐतिहासिक महत्व भी रखता है क्योंकि इसे विश्व प्रसिद्ध दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (Darjeeling Himalayan Railway) का हिस्सा माना जाता है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे को यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर (World Heritage Site) का दर्जा दिया गया है। यह रेलवे लाइन अपने खास डिजाइन, संकरी पटरियों और पहाड़ी रास्तों से गुजरने वाली ट्रेन के लिए जानी जाती है।
टॉय ट्रेन के लिए मशहूर
घुम रेलवे स्टेशन को आमतौर पर टॉय ट्रेन (Toy Train) से जोड़ा जाता है। दार्जिलिंग की यह टॉय ट्रेन दुनिया भर में प्रसिद्ध है। छोटी लेकिन आकर्षक ट्रेन पहाड़ों के बीच से गुजरते हुए यात्रियों को अनोखा अनुभव देती है। टॉय ट्रेन की सवारी करते समय यात्री घने जंगलों, चाय बागानों, पहाड़ी मोड़ों और बादलों से ढकी चोटियों का आनंद लेते हैं। यह सफर रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा संगम है।
बतासिया लूप इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना
घुम रेलवे स्टेशन के पास स्थित बतासिया लूप (Batasia Loop) भी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र है। यह एक खास तरह का रेलवे ट्रैक है जो गोलाकार रूप में बना है। इसका निर्माण ट्रेन को तीखे ढलान पर संतुलित रूप से चढ़ाने के लिए किया गया था। बतासिया लूप से हिमालय पर्वत श्रृंखला और खासकर कंचनजंघा की बर्फ से ढकी चोटियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है। साफ मौसम में यहां से सूर्योदय का दृश्य बेहद आकर्षक होता है, जिसे देखने के लिए पर्यटक सुबह-सुबह पहुंच जाते हैं।
क्यों खास है घुम रेलवे स्टेशन?
घुम रेलवे स्टेशन कई कारणों से विशेष महत्व रखता है:
- भारत का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन
- एशिया के सबसे ऊंचे रेलवे स्टेशनों में शामिल
- यूनेस्को विश्व धरोहर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का हिस्सा
- टॉय ट्रेन की ऐतिहासिक सवारी का प्रमुख पड़ाव
- बतासिया लूप और कंचनजंघा के नजारे का मुख्य केंद्र
यह स्टेशन केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि पर्यटन और विरासत का प्रतीक बन चुका है।
पर्यटन का प्रमुख केंद्र
अपनी ऊंचाई और प्राकृतिक खूबसूरती के कारण घुम रेलवे स्टेशन आज एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो चुका है। यहां हर साल बड़ी संख्या में भारतीय और विदेशी पर्यटक आते हैं। खासतौर पर सर्दियों और गर्मियों की छुट्टियों में यहां भीड़ देखी जाती है। यहां आने वाले लोग टॉय ट्रेन की सवारी के साथ-साथ स्थानीय बाजार, चाय बागान और पहाड़ी संस्कृति का भी अनुभव करते हैं। दार्जिलिंग की ठंडी हवाएं और बादलों से ढकी वादियां यहां की यात्रा को यादगार बना देती हैं।
ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक आकर्षण का संगम
घुम रेलवे स्टेशन एक ऐसा स्थान है जहां इतिहास, इंजीनियरिंग और प्राकृतिक सुंदरता एक साथ दिखाई देते हैं। 1881 में बने इस स्टेशन ने समय के साथ अपनी पहचान और महत्व को बनाए रखा है। आज भी यहां से गुजरने वाली टॉय ट्रेन लोगों के लिए उतनी ही खास है जितनी वर्षों पहले थी। यह स्टेशन भारतीय रेलवे की विरासत और तकनीकी कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है। ऊंचे पहाड़ों के बीच इतनी ऊंचाई पर रेलवे लाइन बिछाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
















