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एक साथ 3 जगहों से चलती है ये ‘अनोखी ट्रेन’, 9 राज्यों का सफर और 88 स्टॉपेज; क्या आपने की है सवारी?

भारतीय रेल का विशाल नेटवर्क लाखों यात्रियों को जोड़ता है, लेकिन अवध-असम एक्सप्रेस (15909/15910) अपनी अनोखी विशेषता से सबको हैरान कर देती है। यह रोज चलने वाली ट्रेन एक ही समय में तीन अलग स्टेशनों पर नजर आती है—नाम, नंबर और रूट एक ही! 3100 किमी का सफर, 88 स्टॉपेज और 9 राज्य पार करने वाली यह ट्रेन चौथे दिन गंतव्य पहुंचती है। सात ट्रेन सेट से संचालित, पूर्वोत्तर से राजस्थान तक विविधता दिखाती है।

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भारत का रेल नेटवर्क दुनिया का सबसे बड़ा और जटिल सिस्टम है, जो रोजाना लाखों यात्रियों को जोड़ता है। लेकिन इस विशाल नेटवर्क में एक ऐसी ट्रेन है जो रेल प्रेमियों को हैरान कर देती है- अवध-असम एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15909/15910)। यह ट्रेन एक ही समय में तीन अलग-अलग जगहों से चलती नजर आती है, यानी एक ही नाम, नंबर और रूट वाली ट्रेनें एक साथ देश के विभिन्न हिस्सों में दौड़ रही होती हैं। यह करिश्मा कैसे संभव है? इसका राज इसकी लंबी दूरी और दैनिक आवृत्ति में छिपा है।​

लंबा सफर और नौ राज्यों की सैर

अवध-असम एक्सप्रेस असम के डिब्रूगढ़ से राजस्थान के लालगढ़ जंक्शन तक 3100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करती है। यह सफर लगभग 66 से 70 घंटे (करीब तीन-चार दिन) लेता है, जिसमें 88 स्टॉपेज आते हैं। ट्रेन असम, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान- इन नौ राज्यों से गुजरती है। औसत रुकने का समय 2-5 मिनट प्रति स्टेशन है, जो कुल मिलाकर साढ़े चार घंटे से ज्यादा बनता है। प्रमुख स्टॉपेजों में न्यू जलपाईगुड़ी, लखनऊ, आनंद विहार, फिरोजपुर कैंट और गुवाहाटी शामिल हैं।​

इस ट्रेन की खासियत यह है कि यह रोज चलती है। स्रोत स्टेशन से रवाना होने के बाद चौथे दिन गंतव्य पहुंचती है, इसलिए एक ट्रेन गंतव्य तक पहुंचने से पहले अगली दो-तीन ट्रेनें रास्ते में होती हैं। नतीजा? एक ही नंबर (15909/15910) वाली तीन ट्रेनें एक साथ अलग-अलग स्टेशनों पर नजर आती हैं। इस संचालन के लिए भारतीय रेलवे को सात ट्रेन सेट की जरूरत पड़ती है- दोनों दिशाओं में तीन-तीन और एक अतिरिक्त रखरखाव के लिए।​

तकनीकी और परिचालन रहस्य

यह ट्रेन ICF कोच वाली है, जिसमें स्लीपर, एसी (A1, B1), पैंट्री कार और जनरल कोच हैं। लोकोमोटिव WDM-3A या WAP-4 होते हैं। औसत स्पीड 46 किमी/घंटा है। डिब्रूगढ़ से लालगढ़ (15909) रात 10:30 बजे चलती है, जबकि उल्टा रूट (15910) शाम 7:50 बजे। टाटकल और प्रीमियम टाटकल उपलब्ध हैं। लंबे सफर के कारण रेलवे ने खान-पान की व्यवस्था मजबूत की है- ई-कैटरिंग और स्टॉपेज पर स्थानीय भोजन।​

यात्रियों के अनुभव बताते हैं कि यह ट्रेन पूर्वोत्तर की चाय बागानों से राजस्थान के रेगिस्तान तक विविधता दिखाती है। एक यात्री ने कहा, “तीन रातें ट्रेन में गुजारना थकाऊ लेकिन यादगार है।” हालांकि, देरी की शिकायतें आम हैं, खासकर मानसून में।​​

प्रमुख स्टॉपेजों की झलक

राज्यप्रमुख स्टेशन उदाहरण
असमडिब्रूगढ़, गुवाहाटी
नागालैंडदीमापुर
पश्चिम बंगालन्यू जलपाईगुड़ी
बिहारकटिहार, मुजफ्फरपुर
उत्तर प्रदेशलखनऊ, गोरखपुर
दिल्लीआनंद विहार/दिल्ली जंक्शन
हरियाणाअंबाला
पंजाबफिरोजपुर कैंट
राजस्थानलालगढ़, सूरतगढ़

रेलवे की मिसाल या चुनौती?

अवध-असम एक्सप्रेस रेलवे की कुशलता का प्रतीक है, जो दैनिक लंबी दूरी को संभालती है। लेकिन भीड़, रखरखाव और मौसम चुनौतियां बनी रहती हैं। IRCTC से बुकिंग आसान है- स्लीपर का किराया लगभग 800-1000 रुपये, एसी में 2500 से ऊपर। क्या आपने इस अनोखी सवारी का आनंद लिया? अगली यात्रा प्लान करें!

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info@gurukulbharti.in

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