
आज के महंगाई भरे दौर में होम लोन की EMI समय पर भरना कई लोगों के लिए चुनौती बन गया है। सैलरी में देरी, अचानक मेडिकल इमरजेंसी या अनपेक्षित खर्चों के कारण कभी-कभी EMI मिस हो जाती है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं! बैंक तुरंत घर जब्त नहीं करते और सिबिल स्कोर भी एकबारगी खराब नहीं होता। विशेषज्ञों के मुताबिक, सही कदम उठाने से नुकसान से बचा जा सकता है। इस रिपोर्ट में हम विस्तार से बताते हैं कि देरी के जोखिम क्या हैं और तुरंत क्या करें।
Table of Contents
देरी के शुरुआती संकेत
EMI की तय तारीख गुजरते ही बैंक का सिस्टम खाता को ओवरड्यू मार्क कर देता है। पहले SMS या ईमेल से रिमाइंडर आता है, फिर 7-10 दिनों में कलेक्शन टीम फोन कर कारण पूछती है। पेनल्टी चार्ज लगना शुरू हो जाता है – आमतौर पर बकाया EMI पर 1-2% लेट फीस या अतिरिक्त ब्याज। उदाहरण के लिए, 50,000 रुपये की EMI पर 1% फीस मतलब 500 रुपये तुरंत जुड़ जाते हैं। देरी जितनी लंबी, ब्याज चक्रवृद्धि तरीके से बढ़ता है। Navbharat Times की पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, छोटी चूक भी सालाना हजारों रुपये का बोझ बन सकती है।
सिबिल स्कोर पर असर
लोगों का सबसे बड़ा डर है – एक EMI लेट तो CIBIL स्कोर डूब जाएगा। सच्चाई यह है कि बैंक 30 दिनों से कम देरी पर क्रेडिट ब्यूरो को सूचना नहीं देते। अगर आप 25-28 दिनों में पेमेंट कर दें, तो स्कोर पर न्यूनतम असर पड़ता है। लेकिन 30+ दिनों की देरी पर ’30 DPD’ (Days Past Due) एंट्री हो जाती है, जो स्कोर को 100-200 पॉइंट्स लुढ़का सकती है।
बार-बार चूक पर स्कोर 500 के नीचे जा सकता है, जिससे नया लोन मिलना नामुमकिन। Universal College और Jaybharath School जैसी साइट्स की सलाह है कि CIBIL ऐप से मासिक रिपोर्ट चेक करें। News18 हिंदी रिपोर्ट बताती है कि अच्छा स्कोर बनाए रखने के लिए अन्य बिल (क्रेडिट कार्ड, यूटिलिटी) समय पर भरें।
बैंक नीलामी का खतरा!
एक EMI मिस पर बैंक घर पर कब्जा नहीं करता। RBI नियमों के तहत, लोन को NPA (Non-Performing Asset) तभी माना जाता है जब 90 दिनों तक लगातार डिफॉल्ट हो। उसके बाद लीगल नोटिस, रिकवरी सूट और अंत में प्रॉपर्टी अटैचमेंट की प्रक्रिया शुरू होती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, होम लोन में यह प्रक्रिया 6-12 महीने लेती है, लेकिन तब तक ब्याज और लीगल फीस लाखों में पहुंच जाती है। HDFC बैंक ब्लॉग सुझाव देता है कि डेट ट्रैप से बचने के लिए पार्ट-पेमेंट करें। एकबारगी चूक घातक नहीं, लेकिन लापरवाही भारी पड़ती है।
तुरंत करें ये 3 जरूरी काम
- बैंक से बात करें: EMI मिस होते ही ब्रांच मैनेजर को कॉल करें। सैलरी डिले या मेडिकल प्रूफ दिखाएं। वे 15-30 दिनों का होल्ड या रिस्ट्रक्चरिंग दे सकते हैं, बिना सिबिल प्रभावित हुए।
- पेनल्टी सहित पे करें या सेटल करें: उपलब्ध फंड से मिनिमम ड्यू चुकाएं। लोन ट्रांसफर (ब्याज दर कम करने के लिए) या मोरेटोरियम अप्लाई करें। इससे ब्याज चेन टूटती है।
- CIBIL मॉनिटर करें: वेबसाइट से फ्री रिपोर्ट लें, डिस्प्यूट फाइल करें अगर गलत एंट्री हो। इमरजेंसी फंड बनाएं और ऑटो-डेबिट सेट करें।
बचाव की रणनीति और विशेषज्ञ सलाह
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि बजट ऐप्स यूज करें, 3-6 महीने का इमरजेंसी फंड रखें। अगर समस्या क्रॉनिक है, तो डेट कंसॉलिडेशन लोन लें। YouTube वीडियोज जैसे ‘बैंक खाते से EMI डेबिट न हुई तो CIBIL कैसे सुधारें’ प्रैक्टिकल टिप्स देते हैं। याद रखें, खुली बातचीत से 80% केस सॉल्व हो जाते हैं।
EMI देरी आम समस्या है, लेकिन स्मार्ट कदम से आपका वित्तीय भविष्य सुरक्षित रहता है। समय रहते ऐक्शन लें, वरना छोटी गलती बड़ा संकट बन जाएगी।
















