
भारतीय काल गणना और सनातन परंपरा के अनुसार, विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ इस बार 18 मार्च 2026 से होने जा रहा है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ ही हिंदू नव वर्ष का उत्सव शुरू हो जाएगा, जिसे देशभर में गुड़ी पड़वा और उगादि जैसे विभिन्न नामों से मनाया जाता है।
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कब से हो रही है शुरुआत?
पंचांग गणना के अनुसार, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ और नव संवत्सर का आगमन बुधवार, 18 मार्च को होगा, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन से ग्रहों के मंत्रिमंडल में नए राजा और मंत्री का चयन होता है, जो आने वाले पूरे वर्ष की दशा और दिशा निर्धारित करते हैं।
विक्रम और शक संवत: क्या है बुनियादी अंतर?
अक्सर लोग विक्रम संवत और शक संवत को लेकर असमंजस में रहते हैं, विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोनों कैलेंडरों में मुख्य अंतर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समय की गणना का है:
- विक्रम संवत की शुरुआत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने 57 ईसा पूर्व (BC) में की थी वहीं, शक संवत की शुरुआत कुषाण राजा कनिष्क ने 78 ईस्वी (AD) में की थी।
- विक्रम संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे चलता है, जबकि शक संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 78 साल पीछे चलता है। इन दोनों संवतों के बीच कुल 135 वर्षों का अंतर है।
- जहाँ विक्रम संवत का उपयोग हिंदू धर्म के व्रत, त्योहार और शुभ मुहूर्त निकालने (पंचांग) के लिए किया जाता है, वहीं शक संवत भारत का ‘राष्ट्रीय कैलेंडर’ है, जिसे सरकारी कामकाज और गजट नोटिफिकेशन के लिए उपयोग किया जाता है।
- विक्रम संवत चंद्रमा की गति पर आधारित ‘चंद्र कैलेंडर’ है, जबकि शक संवत सौर और चंद्र गणनाओं का संतुलित मेल है।
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सांस्कृतिक महत्व
हिंदू नव वर्ष केवल तारीख बदलने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के नव-निर्माण का प्रतीक है, इस समय वसंत ऋतु का प्रभाव रहता है और खेतों में नई फसलें लहलहाती हैं, धार्मिक दृष्टि से, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरु की थी।
















