
भाइयों-बहनों, अगर आप PDS यानी कोटे की दुकान से राशन लेते हैं, तो फरवरी का महीना आपके लिए थोड़ा अलग होने वाला है। शासन ने खाद्यान्न वितरण में बड़ा बदलाव किया है – गेहूं की मात्रा घटा दी गई है, लेकिन चावल बढ़ा दिया गया। अंत्योदय और पात्र गृहस्थी दोनों कैटेगरी के कार्डधारकों पर असर पड़ेगा। पहले तो सब गेहूं की डिमांड करते थे, अब चावल ज्यादा मिलेगा। ये बदलाव खाद्य आयुक्त के निर्देश पर हुआ है। आइए, डिटेल में समझते हैं।
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अंत्योदय कार्डधारकों को क्या मिलेगा नया?
अंत्योदय परिवारों को तो कुल 35 किलो खाद्यान्न मिलता ही है, लेकिन अब ब्रेकअप बदल गया। पहले 14 किलो गेहूं और 21 किलो चावल था। फरवरी से ये हो गया – सिर्फ 10 किलो गेहूं और 25 किलो चावल! यानी 4 किलो गेहूं कम, उतना ही चावल ज्यादा। सोचिए, घर में रोटी बनाने के लिए गेहूं कम पड़ेगा, लेकिन चावल की चटनी-दाल के साथ भरपूर सप्लाई। ये बदलाव स्टॉक के हिसाब से किया गया है, ताकि बर्बादी न हो। लेकिन कई परिवारों को ये पसंद न आए, क्योंकि गेहूं की आदत जो है न!
पात्र गृहस्थी वाले भी प्रभावित
अब बात पात्र गृहस्थी कार्ड की। प्रति व्यक्ति या यूनिट 5 किलो खाद्यान्न मिलता है। पहले इसमें 2 किलो गेहूं और 3 किलो चावल। अब? सिर्फ 1 किलो गेहूं और 4 किलो चावल! हर सदस्य को चावल ज्यादा, गेहूं कम। परिवार बड़ा हो तो कुल मिलाकर चावल का बोरा घर आएगा। ये व्यवस्था पूरे महीने चलेगी। खाद्य विभाग कहता है, स्टॉक इसी रेशियो में आया है, तो वितरण वैसा ही होगा। कोई बहाना नहीं चलेगा।
कोटेदारों की परेशानी: ग्राहक मनाएंगे कैसे?
दुकानदार भाइयों की तो बोलिए! वो कह रहे हैं, “सर्दी में तो सब गेहूं मांगते हैं रोटी के लिए। चावल ज्यादा मिला तो लोग झगड़ेंगे।” उनका पॉइंट सही है – चावल स्टोर करना आसान है, लेकिन ग्राहक की पसंद गेहूं ही। कुछ जगह तो विरोध भी हो सकता है। लेकिन विभाग साफ कह रहा – शासन का ऑर्डर है, उसी हिसाब से बांटो। स्टॉक पहुंच चुका है, वितरण शुरू हो जाएगा। कोटेदारों को ग्राहकों को समझाना पड़ेगा कि ये अस्थायी बदलाव है।
ये बदलाव क्यों? विभाग की सफाई
खाद्य विभाग के अफसर बताते हैं कि ये फैसला स्टॉक बैलेंस करने के लिए लिया गया। गेहूं का स्टॉक कम था, चावल ज्यादा। फरवरी के वितरण में ये एडजस्टमेंट जरूरी था। NFSA के तहत सबको सस्ता अनाज मिलना चाहिए, लेकिन रेशियो बदल सकता है। अगले महीने शायद वापस पुराना हो जाए। फिलहाल, कार्डधारक ऐप या हेल्पलाइन से चेक कर लें। कोई घोटाला न हो, ये सुनिश्चित करें।
ग्राहकों के लिए जरूरी टिप्स
दोस्तों, परेशान न हों। दुकान पर जाएं तो नई मात्रा पूछ लें। आधार लिंकिंग चेक रखें, वरना राशन रुक सकता है। चावल स्टोर करने के टिप्स – एयरटाइट डिब्बे में रखें, कीड़े न लगें। गेहूं कम पड़े तो लोकल मार्केट से खरीद लें, लेकिन कोटे का फायदा उठाएं। परिवार के साथ डिस्कस करें, चावल के नए रेसिपी ट्राई करें। ये बदलाव सीखने का मौका है।
आगे क्या? सतर्क रहें
तो कुल मिलाकर, फरवरी में चावल का राज है राशन में। गेहूं कम मिलेगा, लेकिन पेट भरने को मिलेगा। शासन की ये कोशिश स्टॉक मैनेजमेंट की है, लेकिन ग्राहक-कोटेदार सबको एडजस्ट करना पड़ेगा। न्यूज अपडेट रखें, क्योंकि बदलाव जल्दी आते हैं। आपका राशन सही मिले, यही दुआ है। कोई दिक्कत हो तो लोकल ऑफिसर से बात करें!
















