उत्तर प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन योजना के नियमों में अचानक बड़ा बदलाव हुआ है। अब आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को आयु साबित करने का प्रमाण नहीं माना जाएगा। सरकार के नए निर्देशों ने लाखों बुजुर्ग पेंशनधारकों को चिंता में डाल दिया है। जिनके पास वैकल्पिक दस्तावेज नहीं हैं, उनकी पेंशन रुकने का खतरा बढ़ गया है। यह बदलाव पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया गया है, लेकिन ग्रामीण गरीबों के लिए नई मुश्किल पैदा कर रहा है।

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नियम बदलने की पृष्ठभूमि क्या है?
कई वर्षों से आधार कार्ड को हर सरकारी योजना में मुख्य दस्तावेज बनाया गया था। लेकिन अब पता चला है कि आधार में दर्ज जन्मतिथि कई बार अनुमान पर आधारित या बाद में बदली हुई होती है। असल उम्र से इसका मेल न होने के कारण फर्जी लाभ लेने के मामले सामने आए। केंद्र और राज्य स्तर पर सत्यापन अभियान चलने से यह सच्चाई उजागर हुई। नतीजतन यूपी सरकार ने रातोंरात आदेश जारी कर आधार को आयु प्रमाण की सूची से हटा दिया। सभी आवेदन फॉर्म अब पूरी तरह भरे जाने चाहिए, अधूरे कागजात अब चलेंगे नहीं।
ग्रामीण बुजुर्गों की परेशानी सबसे ज्यादा
ग्रामीण इलाकों में तो हालात चिंताजनक हैं। अधिकांश गरीब परिवारों में जन्म पंजीकरण का चलन ही नहीं रहा। स्कूल न जाने वाले बुजुर्गों के पास न तो मार्कशीट है, न लीविंग सर्टिफिकेट। परिवार रजिस्टर भी पुराने और अपडेट न होने के कारण गायब हो चुके हैं। दूसरे राज्यों में भी इसी तरह सत्यापन से सैकड़ों पेंशनधारकों का भत्ता बंद हो चुका है। यूपी के करीब 50 लाख लाभार्थियों में से ग्रामीण, दलित और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। कई बुजुर्गों ने बताया कि उनके पास तो सिर्फ आधार ही एकमात्र कागज था, अब क्या करेंगे?
अब कौन से दस्तावेज काम आएंगे?
नए नियमों के तहत पेंशन के लिए आयु सिद्ध करने के मुख्य साधन ये हैं, परिवार रजिस्टर की प्रमाणित प्रति जिसमें जन्मतिथि दर्ज हो, हाईस्कूल या इंटरमीडिएट की मार्कशीट या ट्रांसफर सर्टिफिकेट, या जन्म प्रमाण पत्र जो स्थानीय निकाय से जारी हो। वोटर आईडी सहायक भूमिका निभा सकती है, लेकिन यह अकेले पर्याप्त नहीं मानी जाएगी। जिनकी पेंशन संदेहास्पद पाई गई, उन्हें सीमित समय में नया प्रमाण जमा करना होगा।
तुरंत क्या कदम उठाएं पेंशनधारक?
सबसे पहले ग्राम पंचायत या नगर निकाय से परिवार रजिस्टर की नकल निकलवाएं और उसकी सत्यापित कॉपी लें। पुराने स्कूल रिकॉर्ड खोजें या जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करें। ब्लॉक स्तर के समाज कल्याण अधिकारी से अपने जिले के मान्य दस्तावेजों की लिखित जानकारी लें। ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन स्टेटस जांचें और जरूरी कागज अपलोड करें। देरी होने पर पेंशन रिकवरी तक की कार्रवाई हो सकती है।
पारदर्शिता जरूरी, लेकिन व्यवस्था भी चाहिए
फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाना सराहनीय है, पर genuine हकदारों को परेशान करना उचित नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल जांच या मजिस्ट्रेट स्तर पर आयु प्रमाण पत्र जारी करने की वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार से स्पष्टीकरण और ग्रेस पीरियड की मांग तेज हो रही है। ताकि असली जरूरतमंद बुजुर्गों का हक न छने पाए।
















