
उत्तर प्रदेश सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों की सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए निःशुल्क बोरिंग योजना (UP Free Boring Scheme) को जोर-शोर से लागू किया है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के किसानों को 10,000 रुपये तक की सीधी वित्तीय सहायता मिल रही है, जबकि अन्य श्रेणियों के किसानों को भी 5,000 से 7,000 रुपये का लाभ सुनिश्चित किया गया है। सूखे की मार झेल रहे ग्रामीण इलाकों में यह योजना वरदान साबित हो रही है, जहां वर्षा पर निर्भरता के कारण फसलें बर्बाद हो जाती हैं।
योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे किसानों को सस्ती सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि वे गेहूं, धान, सब्जियों जैसी नकदी फसलों की खेती कर आय बढ़ा सकें। राज्य सरकार के लघु सिंचाई विभाग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में हजारों आवेदनों पर बोरिंग कार्य पूरा हो चुका है, जिससे फसल उत्पादकता में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी।
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सब्सिडी का विस्तृत विवरण
किसानों की श्रेणी के आधार पर अनुदान राशि निर्धारित है। SC/ST वर्ग के सीमांत (भूमि 1 हेक्टेयर से कम) और लघु (1-2 हेक्टेयर) किसानों को अधिकतम 10,000 रुपये की सहायता दी जाती है। सामान्य वर्ग के सीमांत किसानों को 7,000 रुपये और लघु किसानों को 5,000 रुपये तक का लाभ मिलता है। इसके अतिरिक्त, “उत्तर प्रदेश मध्यम गहराई नलकूप योजना” से जुड़े लाभ में जल वितरण प्रणाली के लिए अलग से 10,000 रुपये और नलकूप ऊर्जीकरण पर 68,000 रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
यह सब्सिडी कुल लागत का 70 से 90 प्रतिशत तक कवर करती है, बाकी राशि किसान स्वयं वहन करते हैं। पंपसेट की व्यवस्था किसानों को खुद करनी पड़ती है, लेकिन विभाग द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाता है।
पात्रता मानदंड सख्त
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। उसके पास न्यूनतम 0.2 हेक्टेयर (लगभग 50 डिसमिल) से अधिकतम 2.50 एकड़ कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए। SC/ST किसानों के लिए भूमि सीमा में छूट है। महत्वपूर्ण शर्त यह है कि किसान ने पूर्व में कोई अन्य सरकारी सिंचाई योजना (जैसे पीएम किसान या नदी आधारित सिंचाई) का लाभ न लिया हो। परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी न होना भी एक मानदंड है। इन शर्तों से योजना का दुरुपयोग रोका जा रहा है।
आवश्यक दस्तावेज आसानी से जुटाएं
आवेदन के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय-जाति प्रमाण पत्र, भूमि दस्तावेज (खसरा-खतौनी), बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और सक्रिय मोबाइल नंबर जरूरी हैं। इनके अभाव में आवेदन अस्वीकार हो सकता है। विभाग ने सलाह दी है कि दस्तावेज स्कैन करके ऑनलाइन अपलोड करें।
आसान आवेदन प्रक्रिया
किसान लघु सिंचाई विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://minorirrigationup.gov.in या https://divcomkonkan.in/up-boring-online-registration/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट से “निःशुल्क बोरिंग हेतु आवेदन पत्र” डाउनलोड करें, भरें और प्रिंट लें। ऑफलाइन तरीके से स्थानीय खंड विकास अधिकारी (BDO), तहसील या माइनर इरिगेशन कार्यालय में जमा करें। आवेदन प्राप्ति पर विभाग सत्यापन टीम भेजता है, जो भूमि और जलस्तर की जांच करती है। पात्र पाए जाने पर 30-45 दिनों में बोरिंग प्रक्रिया शुरू हो जाती है। आवेदन स्थिति रजिस्टर्ड मोबाइल पर एसएमएस से ट्रैक करें।
किसान संगठनों ने योजना की सराहना की है, लेकिन बजट सीमित होने से आवेदनों की संख्या अधिक होने पर वरीयता तय की जाती है। यदि आपके क्षेत्र में लघु सिंचाई कार्यालय का पता चाहिए या फॉर्म डाउनलोड में मदद, तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से संपर्क करें। सरकार ने 2026 के लिए बजट बढ़ाने का ऐलान किया है, इसलिए जल्द आवेदन करें। यह योजना न केवल सिंचाई की टेंशन खत्म करेगी, बल्कि किसानों को समृद्धि के नए द्वार भी खोलेगी।
















