
हाल ही में अमेरिका द्वारा भारतीय सोलर उत्पादों पर 125.87% (लगभग 126%) का भारी एंटी-सब्सिडी टैरिफ लगाने के फैसले ने भारतीय बाजार में खलबली मचा दी है, हालांकि, आम भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि इसका सीधा असर छत पर सोलर लगवाने की लागत पर नहीं पड़ेगा, बल्कि इसके कुछ अन्य सकारात्मक और नकारात्मक पहलू सामने आ सकते हैं।
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अमेरिका ने क्यों लगाया ‘टैरिफ बम’?
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने 24 फरवरी, 2026 को प्रारंभिक जांच के बाद भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर सेल्स और मॉड्यूल पर भारी शुल्क लगा दिया है। अमेरिका का आरोप है कि भारतीय कंपनियों (विशेषकर अडानी ग्रुप की मुंद्रा सोलर जैसी फर्मों) को अनुचित सरकारी सब्सिडी मिल रही है, जिससे अमेरिकी घरेलू कंपनियों को नुकसान हो रहा है।
भारतीय ग्राहकों पर क्या होगा असर?
- घरेलू बाजार में अधिक उपलब्धता: भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात अब महंगा और मुश्किल हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय मैन्युफैक्चरर्स अपना स्टॉक घरेलू बाजार में खपाने की कोशिश करेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर पैनलों की उपलब्धता बढ़ सकती है।
- मामूली महंगाई का खतरा: हालांकि अमेरिकी टैरिफ से भारत में दाम नहीं बढ़ेंगे, लेकिन भारत सरकार ने चीन और वियतनाम से आने वाले सोलर ग्लास पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सोलर पैनल की कुल लागत में 3% से 5% की मामूली बढ़ोतरी हो सकती है।
पीएम सूर्य घर योजना: अभी भी है फायदे का सौदा
अगर आप अपने घर की छत पर सोलर लगवाना चाहते हैं, तो सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अभी भी सबसे बड़ा सहारा है।
- भारी सब्सिडी: 2 किलोवाट (kW) तक के सिस्टम पर ₹60,000 और 3 किलोवाट या उससे अधिक पर अधिकतम ₹78,000 की सब्सिडी मिल रही है।
- लागत का गणित: सब्सिडी के बाद, एक औसत 3kW सिस्टम का प्रभावी खर्च काफी कम हो जाता है, जो पैनल की कीमतों में होने वाली 3-5% की किसी भी बढ़ोतरी को आसानी से कवर कर लेता है।
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प्रमुख आंकड़े और जानकारी
| विवरण | प्रभाव/राशि |
|---|---|
| अमेरिकी टैरिफ दर | 125.87% (निर्यातित माल पर) |
| संभावित घरेलू मूल्य वृद्धि | 3-5% (सोलर ग्लास ड्यूटी के कारण) |
| अधिकतम सरकारी सब्सिडी | ₹78,000 (3kW+ के लिए) |
| योजना का लक्ष्य | 1 करोड़ घरों को मुफ्त बिजली देना |
शेयर बाजार में इस खबर के बाद वारी एनर्जीज (Waaree Energies) और प्रीमियर एनर्जीज जैसे सोलर शेयरों में 15% तक की गिरावट देखी गई है, लेकिन कंपनियां अमेरिकी बाजार के विकल्प तलाशने में जुट गई हैं।
















