
देश में रोजाना करोड़ों वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं। तेज रफ्तार जिंदगी के इस दौर में लोग जल्दी पहुंचने की होड़ में अक्सर ट्रैफिक नियम भूल जाते हैं। लेकिन यही छोटी लापरवाहियां बड़े हादसों की वजह बन जाती हैं। हर साल सड़क दुर्घटनाओं में हजारों परिवार अपनों को खो देते हैं। तेज रफ्तार से ड्राइविंग, रेड लाइट जंप करना, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना या नशे में गाड़ी चलाना- यह सब अब सिर्फ गलतियां नहीं, बल्कि खतरे की घंटी बन चुके हैं।
सरकार ने सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। 1 जनवरी 2026 से लागू नए मोटर व्हीकल नियमों के तहत एक कैलेंडर वर्ष में 5 या इससे अधिक ट्रैफिक उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस (DL) सस्पेंड किया जा सकता है। यह प्रावधान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अधिसूचित किया है, जिसमें कुल 24 प्रकार के उल्लंघनों को शामिल किया गया है। केवल उसी साल के चालान गिने जाएंगे, पुराने वर्षों के रिकॉर्ड अलग रहेंगे।
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ग्रेडेड अंक प्रणाली: लाइसेंस पर ‘रिपोर्ट कार्ड’
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में घोषणा की कि ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम जल्द देशभर में लागू होगा। इस सिस्टम में हर ड्राइविंग लाइसेंस पर तय अंक आवंटित होंगे। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ये अंक कटेंगे- जैसे स्पीडिंग पर 4 अंक, सिग्नल जंपिंग पर 3, या बिना हेलमेट/सीटबेल्ट पर 2 अंक। अगर अंक शून्य हो जाएं, तो लाइसेंस 6 महीने तक सस्पेंड या स्थायी रूप से रद्द हो सकता है।
यह व्यवस्था ड्राइवरों को जिम्मेदार बनाएगी। मंत्रालय का मानना है कि सिर्फ जुर्माना भरने से आदत नहीं बदलती, इसलिए लाइसेंस पर सीधी मार प्रभावी होगी। सस्पेंशन से पहले RTO/DTO द्वारा सुनवाई होगी, जहां ड्राइवर अपनी सफाई दे सकेगा। सस्पेंशन अवधि 3 महीने तक हो सकती है।
किन उल्लंघनों पर लगेगा ‘5 चालान’ का जाल?
सरकार ने 24 नोटिफाइड ऑफेंस सूचीबद्ध की हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ओवरस्पीडिंग
- रेड लाइट जंपिंग
- बिना हेलमेट/सीटबेल्ट ड्राइविंग
- गलत दिशा में वाहन चलाना
- मोबाइल फोन इस्तेमाल
- नशे में ड्राइविंग
- गलत पार्किंग या ओवरलोडिंग
ई-चालान अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य हैं। 45 दिनों में चालान न भरा तो डिफॉल्ट स्वीकार माना जाएगा, और अगले 30 दिनों में भुगतान जरूरी। देरी पर अतिरिक्त पेनल्टी लगेगी।
क्यों जरूरी यह सख्ती?
भारत में सड़क हादसे वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक हैं। 2025 में लाखों दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें ओवरस्पीडिंग (70%), हेलमेट/सीटबेल्ट न पहनना (20%) मुख्य कारण रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि जुर्माना अपर्याप्त है; व्यवहार परिवर्तन ही समाधान है। नया सिस्टम ड्राइवरों को सतर्क रखेगा, सड़क अनुशासन बढ़ाएगा। दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में ट्रायल सफल रहा। एक सर्वे में 65% ड्राइवरों ने बताया कि लाइसेंस सस्पेंशन का डर नियम पालन कराएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
प्रभाव और भविष्य की राह
यह बदलाव सड़क सुरक्षा क्रांति लाएगा। वाहन चालकों को ऐप्स जैसे Parivahan या mParivahan से चालान ट्रैक करने चाहिए। बार-बार अपराधी अब सजा से बच नहीं पाएंगे। सरकार का लक्ष्य 2030 तक हादसों में 50% कमी है। ड्राइवर सतर्क रहें, सुरक्षित ड्राइव करें- जिंदगियां बचाएं।
















