भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता आम हो गए हैं। ऐसे में भारत सरकार की टेली-मानस हेल्पलाइन ने लाखों लोगों को नई उम्मीद दी है। यह 24 घंटे चलने वाली मुफ्त सेवा हर किसी को भावनात्मक मजबूती और जरूरी सलाह पहुंचा रही है। खासकर पंजाब जैसे राज्यों में यह किसानों, नौजवानों और महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है।

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शुरुआत और तेजी से फैलाव
दो साल पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस योजना को शुरू किया था। शुरुआत में एक ही केंद्र से काम शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही यह पूरे देश में फैल गया। आज हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में अलग-अलग सेल सक्रिय हैं। ग्रामीण इलाकों तक पहुंचने वाली यह सेवा मनोचिकित्सकों की कमी को पूरा कर रही है। अब तक लाखों फोन आए हैं, जिनमें से ज्यादातर तनाव और नींद की परेशानियों से जुड़े थे। रोजाना हजारों लोग इससे जुड़ रहे हैं।
क्या मिलती है मदद?
फोन उठाते ही प्रशिक्षित काउंसलर आपकी बात सुनते हैं। चाहे पारिवारिक झगड़े हों, नौकरी का दबाव हो या उदासी का साया, वे धैर्य से समझाते हैं। दर्जन भर से ज्यादा स्थानीय भाषाओं में बात हो सकती है। गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है, इसलिए बेझिझक अपनी बात कहें। अगर जरूरत पड़े तो वे नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल से जोड़ देते हैं। फॉलो-अप कॉल भी होते हैं ताकि सुधार बना रहे।
संपर्क का आसान तरीका
सबसे सरल तरीका है टोल-फ्री नंबर डायल करना। 14416 या 18008914416 पर कॉल करें, जो हर नेटवर्क से मुफ्त है। रात हो या दिन, छुट्टी हो या त्योहार, सेवा हमेशा चालू रहती है। मोबाइल ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं, जिसमें वीडियो कॉल की सुविधा भी है। युवाओं और दूर के गांवों वालों के लिए यह खास तौर पर उपयोगी है।
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प्रभाव और लोगों की कहानियां
पंजाब में ड्रग्स की लत और खेती की मुश्किलें मानसिक बोझ बढ़ा रही हैं। यहां कई किसानों ने बताया कि एक फोन कॉल ने उनकी जिंदगी संभाल ली। महिलाएं घरेलू तनाव से उबर रही हैं, जबकि छात्र परीक्षा के दबाव से निजात पा रहे हैं। कोविड के बाद ऐसे मामले बढ़े, लेकिन यह हेल्पलाइन ने हालात संभाले। सोशल मीडिया पर इसके प्रचार से जागरूकता फैली है। लोग अब खुलकर बात कर रहे हैं।
मुश्किलें और आगे की राह
फिर भी गांवों में लोग अभी शर्माते हैं। स्टिग्मा हटाने के लिए ज्यादा प्रचार जरूरी है। डॉक्टरों की तादाद बढ़ानी होगी ताकि हर कॉल का बेहतर जवाब मिले। सरकार अब वीडियो सुविधा को और मजबूत कर रही है। डेटा से पता चल रहा है कि नौजवानों में चिंता के केस ज्यादा हैं, इसलिए उनके लिए खास कार्यक्रम बन रहे हैं। स्थानीय वर्कशॉप भी हो रही हैं।
आखिर में एक संदेश
मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें। यह ताकत का प्रतीक है। अगर खुद या अपनों को तकलीफ हो तो फौरन संपर्क करें। एक छोटी सी कॉल जिंदगी बदल सकती है। टेली-मानस साबित कर रही है कि मदद दूर नहीं, बस एक नंबर की दूरी पर है। सब मिलकर इस अच्छे कदम को और मजबूत बनाएं।
















