
आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से परेशान किसानों के लिए केंद्र और राज्य सरकारें राहत की बड़ी खबर लेकर आई हैं। देशभर में खेतों की तारबंदी (फेंसिंग) योजनाओं के तहत लाखों किसानों को 50% से 70% तक की मोटी सब्सिडी मिल रही है। इससे न केवल फसल नुकसान रुकेगा, बल्कि किसानों का आर्थिक बोझ भी कम होगा। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में ये योजनाएं जोर-शोर से चल रही हैं, जहां सैकड़ों किसान पहले ही लाभ उठा चुके हैं।
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राजस्थान तारबंदी योजना
राजस्थान सरकार की ‘तारबंदी योजना’ किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। लघु एवं सीमांत किसानों को 400 रनिंग मीटर तारबंदी पर लागत का 60% या अधिकतम 48,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है, जबकि सामान्य किसानों को 50% या 40,000 रुपये। अगर 10 किसान मिलकर 5 हेक्टेयर भूमि पर सामूहिक तारबंदी कराते हैं, तो 70% या 56,000 रुपये प्रति किसान (400 मीटर तक) का लाभ मिलता है। 2025-26 से वनाधिकार पट्टा धारकों को 90% या 72,000 रुपये तक अनुदान का प्रावधान है।
पात्रता में न्यूनतम 0.5 हेक्टेयर (लगभग 2 बीघा) भूमि जरूरी है। दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, जन आधार, 6 महीने पुरानी जमाबंदी नकल और बैंक पासबुक अपलोड करनी होंगी। आवेदन राज किसान साथी पोर्टल (rajkisan.rajasthan.gov.in) या ई-मित्र केंद्र से हो जाता है। स्वीकृति पर विभागीय अधिकारी साइट सत्यापन करते हैं, फिर DBT से राशि खाते में आ जाती है।
उत्तर प्रदेश: सोलर फेंसिंग से झटका, कोई चोट नहीं
उत्तर प्रदेश की ‘मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना’ में सोलर फेंसिंग पर 60% सब्सिडी दी जा रही है। बागवानी फसलों के लिए 150 रुपये प्रति मीटर (50% लागत) की सहायता है। 12 वोल्ट का हल्का करंट जानवरों को झटका देकर भगाता है, बिना नुकसान पहुंचाए। पंजीकरण dbt.uphorticulture.in पर करें, जहां किसान आईडी बनाकर दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। यह योजना विशेष रूप से जंगली सूअर और नीलगाय प्रभावित क्षेत्रों में लोकप्रिय है।
मध्य प्रदेश: क्लस्टर आधारित 200 रुपये प्रति मीटर
मध्य प्रदेश की तार फेंसिंग योजना में प्रति रनिंग मीटर 200 रुपये या 50% लागत (जो कम हो) मिलती है। क्लस्टर में 2 हेक्टेयर भूमि वाले समूह या व्यक्तिगत किसान पात्र हैं। आवेदन कृषि/उद्यानिकी विभाग पोर्टल से होता है।
सामान्य आवेदन प्रक्रिया
सभी योजनाओं में प्रक्रिया एक जैसी है। पहले राज्य कृषि पोर्टल पर किसान आईडी बनाएं। भूमि दस्तावेज (खतौनी/जमाबंदी), आधार, बैंक विवरण अपलोड करें। अधिकारी भौतिक सत्यापन करेंगे, कार्य पूरा होने पर बिल जमा कर DBT से भुगतान पाएं। देरी से बचने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में आवेदन करें।
ये योजनाएं किसानों की लंबी मांग पूरी कर रही हैं। राजस्थान के किसान जितेंद्र ने कहा, “आवारा पशुओं से मुक्ति मिली, फसल सुरक्षित रही।” हालांकि, बजट सीमाओं के कारण सभी को तुरंत लाभ न मिले, तो जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करें। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में ये योजनाएं और विस्तारित होंगी। किसान भाइयों, देर न करें- अभी आवेदन करें और अपनी फसलें बचाएं!
















