भारतीय शेयर बाजार में भारी भूकंप आ गया है। वैश्विक तनावों ने निवेशकों को हिलाकर रख दिया, सेंसेक्स हजारों अंकों की छलांग नीचे लगा ली और निफ्टी भी गहरी खाई में गिर गया। उधर सोने के दाम आसमान छू रहे हैं, प्रति दस ग्राम 24 कैरेट सोना लाख छह हजार के पार पहुंच चुका। होली-शादी के मौसम में यह उछाल आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा, लेकिन समझदार निवेशक इसे संकट का सबसे मजबूत कवच मान रहे। आखिर शेयरों की मार के इस दौर में सोना ही क्यों बनता है सबसे भरोसेमंद साथी? चलिए इसकी परतें खोलते हैं।

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शेयर बाजार क्यों लड़खड़ा गया?
पिछले कुछ दिनों से बाजार में हाहाकार मच गया। ईरान-इजरायल जैसे वैश्विक संकटों ने कच्चे तेल के भावों को रफ्तार दे दी, महंगाई का भूत फिर सर पर चढ़ आया। फरवरी में ही निवेशकों के तीन लाख करोड़ रुपये धूल चाट गए थे। बजट पेश होने के बाद भी बाजार डगमगाया, विदेशी निवेशक भागे और ऊंची कीमतों ने ब्रेक लगाया। बैंकिंग, आईटी जैसे बड़े सेक्टर सबसे ज्यादा चपेट में हैं। आज सुबह निफ्टी का स्तर भी नाजुक संतुलन पर टिका दिखा। विशेषज्ञ चेताते हैं कि यह गिरावट लंबी खिंच सकती है, ऐसे में साधारण निवेशक घबरा जाए तो अचरज नहीं।
सोने की चमक क्यों बढ़ी?
सोना इस तमाशे का हीरो बन गया। एक हफ्ते में ही इसके दाम हजारों रुपये उछल चुके। दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में 22 कैरेट सोना भी नब्बे हजार के ऊपर बिक रहा। वैश्विक बाजार में प्रति औंस कीमत पांच हजार डॉलर को पार कर चुकी। डॉलर की ताकत और भारत में आयात खर्चों ने इसे और महंगा ठेल दिया। पिछले साल से सोने ने दोगुने से ज्यादा रिटर्न थमा दिए, जबकि शेयर सूचकांक पिछड़ते नजर आए। त्योहारों के दौर में ज्वेलर्स की दुकानों पर भीड़ तो है, लेकिन खरीदार सोच-समझकर कदम उठा रहे।
असली तिजोरी क्यों कहलाता है सोना?
इतिहास गवाह है कि हर संकट में सोना अटल रहता। 2008 का वैश्विक मंदी का दौर हो या 2020 का महामारी संकट, सोने ने हमेशा स्थिरता का परिचय दिया। इसकी मात्रा सीमित है, कोई कंपनी इसे बंद नहीं कर सकती। महंगाई बढ़े, मुद्रा कमजोर हो या युद्ध छिड़े, लोग सोने की शरण लेते हैं। शेयरों में उतार-चढ़ाव तो रहता ही है, लेकिन सोना लंबे समय में सालाना दस बारह फीसदी रिटर्न देता आया। भारत में तो यह सांस्कृतिक धरोहर भी है, शादी-त्योहार से लेकर आपातकाल तक हर मोर्चे पर काम आता। कोई डिविडेंड तो नहीं मिलता, लेकिन बिक्री की गारंटी रहती।
खरीदें या रुकें? सही रणनीति क्या?
शेयरों की दुर्दशा में सोना विपरीत रुख अपनाता है, यही इसका जादू। अभी खरीदारी का मौका लगता है, खासकर लंबी दूरी तय करने वालों के लिए। लेकिन जल्दबाजी न करें। छोटी-छोटी किश्तों में निवेश करें, जैसे सोने के बॉन्ड या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर। ज्वेलरी से परहेज करें क्योंकि उसमें अतिरिक्त खर्च जुड़ जाता। ऐप्स के जरिए इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड या फंड चुनें, उतार आने पर फायदा होगा। छोटा करेक्शन भी संभव है, इसलिए पोर्टफोलियो का पांच से दस फीसदी सोने तक सीमित रखें। देहरादून जैसे शहरों में सोलर योजनाओं के साथ गोल्ड लोन भी चलन में हैं।
बाजार की अनिश्चितता भले ही डराए, सोना हर बार मुस्कुराता है। फाइनेंशियल सलाहकार से बात जरूर करें। संकट ही तो सोने को चमकाने का बहाना बनता।
















