हर रसोई में मौजूद गैस सिलेंडर आपकी सुविधा का साथी है, लेकिन इसके ऊपरी हिस्से पर खोदे गए छोटे नंबर आपकी सुरक्षा का सबसे बड़ा पहरेदार हैं। ये नंबर सिलेंडर की जांच की तारीख बताते हैं। अगर इन्हें नजरअंदाज किया तो गैस लीक या विस्फोट जैसी बड़ी त्रासदी हो सकती है। हाल के वर्षों में कई हादसों ने साबित किया है कि थोड़ी सी जागरूकता जानमाल की हिफाजत कर सकती है।

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नंबरों की खास जगह
सिलेंडर को पलटकर देखें तो हैंडल या स्टे के पास धातु की पट्टियों पर ये नंबर मिलेंगे। आमतौर पर तीन पट्टियों में से किसी एक पर A, B, C या D जैसे अक्षर के साथ दो अंक लिखे होते हैं, जैसे B25 या C26। ये नंबर कभी वजन के निशान या अन्य कोड के बीच छिपे हो सकते हैं, लेकिन ध्यान से ढूंढने पर साफ नजर आते हैं। नया सिलेंडर घर आने पर सबसे पहले इन्हें चेक करना न भूलें।
अक्षरों का गहरा अर्थ
ये चार अक्षर साल को चार हिस्सों में बांटते हैं। A का मतलब जनवरी से मार्च की पहली तिमाही, B यानी अप्रैल से जून की दूसरी तिमाही। इसी तरह C जुलाई से सितंबर और D अक्टूबर से दिसंबर को दर्शाता है। उसके बाद के दो अंक साल के आखिरी दो डिजिट हैं। मसलन, अगर कोड D25 है तो मतलब दिसंबर 2025 तक सिलेंडर की जांच हो जानी चाहिए। फरवरी 2026 में अगर आपके सिलेंडर पर इससे पुराना कोड है, तो खतरे की घंटी बज रही है।
सिलेंडर की उम्र और जांच का महत्व
एक सामान्य गैस सिलेंडर 15 से 30 साल तक चल सकता है, लेकिन 10 साल बाद इसे पहली बार विशेष परीक्षण से गुजारना जरूरी होता है। ये परीक्षण हाइड्रोस्टेटिक या न्यूमेटिक तरीके से होते हैं, जिसमें सिलेंडर पर दबाव डालकर उसकी मजबूती जांचते हैं। पास होने पर हर पांच साल बाद दोबारा टेस्ट। नाकाम होने पर सिलेंडर को तुरंत नष्ट कर दिया जाता है। पुराने या बिना टेस्ट वाले सिलेंडर जंग खा जाते हैं, जिससे गैस रिसाव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
हादसों की काली सच्चाई
देशभर में सालाना दर्जनों ब्लास्ट की खबरें इसी लापरवाही से जुड़ी हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में लोग पुराने सिलेंडर सस्ते दामों पर खरीद लेते हैं, बिना उनकी जांच के। पंजाब जैसे राज्य में जहां किसान और छोटे कारोबारी सिलेंडर का भरपूर इस्तेमाल करते हैं, यह समस्या और गंभीर है। एक छोटा रिसाव सुबह की चाय से लेकर पूरे घर को तबाह कर सकता है।
सुरक्षा के आसान कदम
सबसे पहले डिलीवरी पर सिलेंडर का वजन जांचें, जो 14.2 किलो नेट होना चाहिए। कोड पढ़कर तारीख निकालें और अगर बीत चुकी है तो इस्तेमाल न करें। नजदीकी गैस एजेंसी को सौंप दें, वे मुफ्त में नया या सर्विस्ड सिलेंडर देंगे। सिलेंडर को हमेशा ठंडी जगह पर रखें, धूप या आग से दूर। रेगुलेटर को साफ रखें और गंध आने पर तुरंत वेंटिलेशन करें। हर छह महीने में कोड दोहराकर देखें।
जागरूकता ही बचाव
सरकारी योजनाओं जैसे उज्ज्वला ने लाखों घरों तक सिलेंडर पहुंचाए, लेकिन इन कोड्स की जानकारी हर उपभोक्ता तक पहुंचनी चाहिए। स्थानीय एजेंसियां जागरूकता कैंप लगा सकती हैं। याद रखें, ये नंबर सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि आपके परिवार की ढाल हैं। आज ही चेक करें, कल का इंतजार न करें। छोटी सी सतर्कता बड़ी मुसीबत से बचा सकती है।
















