
कमोडिटी मार्केट में इन दिनों हलचल मची हुई है, रिकॉर्ड ऊंचाई को छूने वाली चांदी की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है 29 जनवरी 2026 को ₹4,20,000 प्रति किलोग्राम के अपने ऐतिहासिक शिखर (All-Time High) को छूने के बाद, चांदी की कीमतें अब 40% से अधिक टूटकर ₹2,46,000 के करीब आ गई हैं।
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आखिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्रैश के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण हैं:
- मुनाफावसूली का दबाव: रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने जमकर बिकवाली की है, जिससे कीमतों में भारी करेक्शन आया।
- डॉलर की मजबूती: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और डॉलर इंडेक्स में उछाल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं के दाम गिरा दिए हैं।
- ग्लोबल डिमांड में कमी: दुनिया के सबसे बड़े खरीदार चीन की ओर से औद्योगिक मांग में आई गिरावट का सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ा है।
क्या यही है खरीदारी का सही समय?
चांदी की कीमतों में इस भारी गिरावट ने आम जनता के लिए खरीदारी की खिड़की खोल दी है, विशेषज्ञों का इस पर क्या कहना है, आइए जानते हैं:
- विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह स्तर काफी आकर्षक है। हालांकि, बाजार में अभी अस्थिरता (Volatility) बनी रह सकती है।
- बाजार के जानकारों का कहना है कि एक साथ बड़ी राशि निवेश करने के बजाय ‘सिप’ (SIP) या किस्तों में खरीदारी करना ज्यादा सुरक्षित है।
- ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए यह एक राहत भरी खबर है। ऑल-टाइम हाई के मुकाबले अब चांदी खरीदना काफी सस्ता पड़ रहा है।
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चांदी की कीमतों में आया यह 40% का करेक्शन बाजार में एक संतुलन बनाने की कोशिश है। हालांकि कीमतें और नीचे जा सकती हैं या नहीं, यह ग्लोबल मार्केट के अगले कदमों पर निर्भर करेगा, लेकिन जानकारों के मुताबिक, गिरावट के इस दौर में धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
















