
आज के डिजिटल दौर में बैंक खाते में पैसे जमा करना आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बचत खाते (Savings Account) में ज्यादा कैश रखने या जमा करने पर आयकर विभाग का रडार आप पर लग सकता है? कानूनी तौर पर कोई सख्त अधिकतम सीमा तो नहीं है, लेकिन ₹10 लाख से अधिक का वार्षिक कैश डिपॉजिट सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर में आ जाता है। अगर स्रोत साबित न कर पाए, तो 84% तक टैक्स और पेनल्टी का खतरा! आइए, इसकी गहराई से पड़ताल करें।
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वार्षिक ₹10 लाख की रिपोर्टिंग सीमा
वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में अगर आपके एक या ज्यादा बचत खातों में कुल ₹10 लाख या इससे ज्यादा कैश जमा होता है, तो बैंक Statement of Financial Transactions (SFT) के तहत आयकर विभाग को रिपोर्ट करता है। यह नियम Section 285BA के अधीन है। विभाग तुरंत आपसे फंड्स के सोर्स की डिटेल मांग सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर आप बिजनेस से कैश कमाते हैं और बिना ITR में घोषित किए जमा करते हैं, तो नोटिस आते ही घबराहट हो सकती है। लाखों लोग हर साल ऐसे फंसते हैं, खासकर छोटे व्यापारी या फ्रीलांसर।
दैनिक ₹50,000 कैश पर PAN जरूरी
एक ही दिन में ₹50,000 से ज्यादा कैश जमा करने पर PAN कार्ड दिखाना अनिवार्य। बिना PAN के फॉर्म 60 या 61 भरना पड़ता है। बैंकों जैसे SBI, HDFC या PNB में यह नियम सख्ती से लागू है। छोटे डिपॉजिट पर कोई दिक्कत नहीं, लेकिन बार-बार बड़े अमाउंट डालने से फ्लैग हो जाता है।
₹2 लाख से ऊपर कैश ट्रांजेक्शन पर 100% पेनल्टी!
एक दिन में या एक ही इवेंट में ₹2 लाख से ज्यादा कैश लेना-देना गैरकानूनी। चाहे जमा हो या निकासी, Section 269ST के तहत पूरी राशि जितना जुर्माना लग सकता है। यह नियम नकद अर्थव्यवस्था को रोकने के लिए है।
कैश निकासी पर TDS होगा लागू?
वर्ष में ₹1 करोड़ से ज्यादा कैश निकालने पर 2% TDS लागू। अगर पिछले 3 साल से ITR नहीं भरा, तो सीमा घटकर ₹20 लाख। यह PAN आधारित है और सीधे आपके टैक्स अकाउंट में जाता है।
| नियम | सीमा | परिणाम |
|---|---|---|
| वार्षिक कैश डिपॉजिट | ₹10 लाख | SFT रिपोर्ट, नोटिस |
| दैनिक PAN जरूरी | ₹50,000 | फॉर्म 60/61 |
| प्रतिबंधित कैश ट्रांजेक्शन (269ST) | ₹2 लाख/दिन | 100% जुर्माना |
| वार्षिक कैश विदड्रॉल TDS | ₹1 करोड़ (या ₹20 लाख) | 2% TDS कटौती |
नोटिस मिला तो क्या होगा?
अगर डिपॉजिट ITR से मैच न करे, तो Section 68 के तहत अनक्लेम्ड इनकम माना जाएगा। टैक्स: 60% + 25% सरचार्ज + 6% पेनल्टी = कुल ~84%! बचाव के लिए सैलरी स्लिप, सेल डीड, लोन डॉक्यूमेंट्स या बैंक स्टेटमेंट रखें। CompliancePortal.in के आंकड़ों से हर साल 5 लाख से ज्यादा ऐसे केस नोटिस में आते हैं।
डिजिटल पेमेंट अपनाएं, परेशानी से बचें
- हमेशा NEFT/RTGS/UPI यूज करें – कैश पर ही सेंट्रल मॉनिटरिंग।
- ITR समय पर फाइल करें, सभी सोर्स डिक्लेयर।
- करंट अकाउंट के लिए नियम थोड़े अलग (व्यापारिक लिमिट हाई), लेकिन सवाल पूछें तो डिटेल दें।
यह नियम डेमोक्रेटाइजेशन ऑफ फाइनेंस का हिस्सा हैं, लेकिन अनजाने में फंसने से बचें। अपनी फाइनेंशियल हेल्थ चेक करें, आज ही बैंक स्टेटमेंट देख लें!
















