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राजाओं जैसा ठाठ! ये हैं भारत के 5 सबसे अमीर राजघराने; एक के पास बकिंघम पैलेस से बड़ा घर, तो दूसरे के पास है खजाने का अंबार

भारत के सबसे अमीर राजघराने आज भी शाही ठाठ जीते हैं। वायरल लिस्ट में जोधपुर (₹22,000 करोड़), जयपुर, बड़ौदा गायकवाड़ (लक्ष्मी विलास पैलेस-बकिंघम से बड़ा), मेवाड़ (खजाने का अंबार) और मैसूर वाडियार टॉप हैं। हेरिटेज होटल, ज्वेलरी से कमाई। ये विरासत को बिजनेस में बदल चुके हैं।

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राजाओं जैसा ठाठ! ये हैं भारत के 5 सबसे अमीर राजघराने; एक के पास बकिंघम पैलेस से बड़ा घर, तो दूसरे के पास है खजाने का अंबार

राजा-महाराजाओं का वैभवशाली दौर भले ही आजादी के बाद खत्म हो गया हो, लेकिन भारत के कई पूर्व राजघराने आज भी अपनी अपार संपत्ति और शाही ठाठ-बाट से लोगों को चकित कर देते हैं। सोशल मीडिया पर ‘upscworldofficial’ नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से वायरल हो रही एक लिस्ट ने इन राजपरिवारों की संपत्ति पर फिर से बहस छेड़ दी है। इसमें जोधपुर से त्रावणकोर तक के राजघरानों की अनुमानित नेट वर्थ बताई गई है, जो हजारों करोड़ में है। हालांकि ये आंकड़े अनुमानित हैं और विभिन्न स्रोतों में थोड़ी भिन्नता है, लेकिन ये परिवार हेरिटेज होटलों, पर्यटन, ज्वेलरी और जमीनों से अपनी कमाई बनाए रखे हुए हैं।

वायरल लिस्ट: टॉप राजघरानों की संपत्ति का अनुमान

इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, भारत के ये प्रमुख राजघराने अपनी विरासत को आधुनिक बिजनेस मॉडल में बदल चुके हैं। लिस्ट में शामिल हैं:

  • जोधपुर रॉयल फैमिली: 22,000 करोड़ रुपये की संपत्ति। मारवाड़ राठौड़ वंश के पास उम्मेद भवन पैलेस है, जो ताज ग्रुप का लग्जरी होटल है। मेहरानगढ़ किला पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। महाराजा गज सिंह द्वितीय के नेतृत्व में ये परिवार हॉस्पिटैलिटी से सालाना अरबों कमाता है।
  • जयपुर का राजपरिवार: भी 22,000 करोड़ का वेल्थ। कछवाहा वंश के पास सिटी पैलेस, हवा महल और अम्बर किला जैसे आइकॉनिक स्मारक हैं। ज्वेलरी ट्रेजर और हेरिटेज होटल उनकी आय के मुख्य स्रोत हैं। वर्तमान महाराजा पद्मनाभ सिंह फैशन और पोलो जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
  • राजकोट की रॉयल फैमिली: 20,000 करोड़ बताई गई संपत्ति। जडेजा वंश के ये परिवार गुजरात के राजकोट में अपनी जमीनों और प्रॉपर्टीज से जुड़ा है। हालांकि मुख्यधारा की रिपोर्ट्स में इन्हें टॉप 5 में कम ही गिना जाता है, लेकिन स्थानीय विरासत होटलों से इनकी मजबूत पकड़ है।
  • बड़ौदा का गायकवाड़ परिवार: 20,000 करोड़ की संपत्ति। लक्ष्मी विलास पैलेस यहां का गौरव है, जो ब्रिटेन के बकिंघम पैलेस से चार गुना बड़ा है। समरजीत सिंह गायकवाड़ के पास आर्ट कलेक्शन, लैंड बैंक और म्यूजियम हैं। ये परिवार संस्कृति और मंदिर ट्रस्टों में भी निवेश करता है।
  • मेवाड़ का राजपरिवार: पोस्ट में 10,000 करोड़ बताया गया, लेकिन हालिया रिपोर्ट्स में ये 50,000 करोड़ तक पहुंच चुके हैं। उदयपुर के सिसोदिया वंश के पास सिटी पैलेस, लेक पैलेस और जगमंदिर जैसे हेरिटेज होटल हैं। खजाने का अंबार ज्वेलरी और ऐतिहासिक कलाकृतियों से भरा है। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।

इसके अलावा वाडियार फैमिली (मैसूर)त्रावणकोर राजपरिवार और अलसिसर राजघराना को भी 10,000 करोड़ और 3,000 करोड़ की संपत्ति के साथ लिस्टेड किया गया है। वाडियारों का मैसूर पैलेस दशहरा उत्सव के लिए मशहूर है, जबकि त्रावणकोर का पद्मनाभस्वामी मंदिर दुनिया का सबसे अमीर मंदिर है। अलसिसर राजस्थान का छोटा लेकिन धनी परिवार है।

संपत्ति के स्रोत: राजसी विरासत से आधुनिक कमाई

ये राजघराने अब राज नहीं, बल्कि स्मार्ट बिजनेसमैन हैं। हेरिटेज होटल उनके सबसे बड़ा राजस्व स्रोत हैं – जैसे जोधपुर का उम्मेद भवन रात की एक रूम बुकिंग पर लाखों रुपये वसूलता है। जयपुर और उदयपुर पर्यटन हब हैं, जहां लाखों पर्यटक आते हैं। बड़ौदा का पैलेस म्यूजियम सालाना करोड़ों की एंट्री फीस देता है। इसके अलावा ज्वेलरी ब्रांड्स (जैसे जयपुर के गणेश ज्वेलर्स), रियल एस्टेट और शेयर मार्केट में निवेश से आय बढ़ती है। मेवाड़ का खजाना और त्रावणकोर का मंदिर ट्रस्ट इनकी संपत्ति को और मजबूत बनाते हैं।

कई परिवार राजनीति और सोशल वर्क में सक्रिय हैं। उदाहरणस्वरूप, जयपुर के महाराजा भाजपा से जुड़े रहे हैं, जबकि गायकवाड़ शिक्षा और कला को प्रोत्साहित करते हैं। ये परिवार अपनी संपत्ति को ट्रस्टों में रखते हैं, जो टैक्स लाभ भी देता है।

वायरल लिस्ट पर सवाल: सच्चाई कितनी?

upscworldofficial की ये लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, लेकिन विशेषज्ञ आंकड़ों पर सवाल उठाते हैं। मिसाल के तौर पर, मेवाड़ की संपत्ति 50,000 करोड़ बताई जाती है, न कि 10,000। जोधपुर-जयपुर को 22,000 करोड़ से ज्यादा अनुमानित किया जाता है। राजकोट को मुख्य लिस्ट्स में कम स्थान मिलता है। ये आंकड़े सार्वजनिक स्रोतों जैसे फोर्ब्स या मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित लगते हैं, लेकिन आधिकारिक वैल्यूएशन नहीं। फिर भी, ये लिस्ट राजघरानों की आर्थिक ताकत को रेखांकित करती है।

भविष्य: विरासत की रक्षा

आज के दौर में ये परिवार पर्यावरण, शिक्षा और टूरिज्म को बढ़ावा दे रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के बीच उदयपुर के महल सस्टेनेबल टूरिज्म पर फोकस कर रहे हैं। बड़ौदा का पैलेस डिजिटल टूर्स चला रहा है। ये राजघराने साबित कर रहे हैं कि राजसी खून अब भी ‘ठाठ’ बनाए रख सकता है।

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info@gurukulbharti.in

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