
मध्यम वर्ग और टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बजट 2025 के बाद अब सालाना ₹17 लाख से अधिक कमाने वालों के लिए भी इनकम टैक्स को ‘शून्य’ करना संभव हो गया है, नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) के तहत सरकार ने स्लैब में जो बदलाव किए हैं, उसका सही इस्तेमाल कर आप अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बचा सकते हैं।
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रेंटल इनकम का ‘30% रूल’ बना गेम चेंजर
यदि आप किराए से कमाई (Rental Income) करते हैं, तो आयकर विभाग आपको एक विशेष रियायत देता है, धारा 24(a) के तहत, कुल किराए पर सीधे 30% की कटौती मिलती है।
- गणित समझें: अगर आपकी सालाना रेंटल इनकम ₹17.14 लाख है, तो 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन (करीब ₹5.14 लाख) घटाने के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम महज ₹12 लाख रह जाएगी।
- Zero Tax का फायदा: नई टैक्स रिजीम में ₹12 लाख तक की आय पर ₹60,000 की टैक्स रिबेट मिलती है। इस तरह ₹17 लाख से ज्यादा की कमाई पर भी आपका टैक्स ₹0 हो जाता है।
सैलरी क्लास के लिए क्या है रणनीति?
सिर्फ रेंटल इनकम ही नहीं, बल्कि वेतनभोगी कर्मचारी (Salaried Class) भी स्मार्ट प्लानिंग से ₹17 लाख पर टैक्स बचा सकते हैं:
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: बजट 2025 में इसे बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है, जो सीधे आपकी कुल आय से घट जाता है।
- NPS का जादू (80CCD(2)): अगर आपका एम्प्लॉयर आपकी बेसिक सैलरी का 14% NPS में डालता है, तो यह पूरी राशि टैक्स फ्री होती है। ₹17 लाख की सैलरी पर यह राशि करीब ₹1.5 लाख से ₹2 लाख तक हो सकती है।
- कॉर्पोरेट भत्ते: मोबाइल, इंटरनेट और फूड कूपन जैसे भत्ते भी टैक्स के दायरे से बाहर रखने में मदद करते हैं।
होम लोन और जॉइंट ओनरशिप का लाभ
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपने प्रॉपर्टी पर होम लोन लिया है और उसे किराए पर दिया है, तो आप उस पर दिए जाने वाले ब्याज की पूरी कटौती क्लेम कर सकते हैं, इसके अलावा, प्रॉपर्टी को पति/पत्नी के साथ जॉइंट ओनरशिप में रखने से रेंटल इनकम दो हिस्सों में बंट जाती है, जिससे दोनों को अलग-अलग टैक्स छूट का लाभ मिलता है।
















