
गरीबी रेखा से ऊपर (APL) और अंत्योदय (AAY) राशन कार्ड धारकों के लिए फरवरी महीना परेशानी भरा साबित हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों के नए फैसलों से आटा-गेहूं की मात्रा में कमी, e-KYC की अनिवार्यता और अपात्रों के नाम कटने से लाखों परिवार चिंतित हैं। हिमाचल प्रदेश में APL कार्ड वालों को 14 किलो के बजाय महज 13 किलो आटा मिल रहा है, जबकि छोटे परिवारों का कोटा व्यक्ति-आधारित हो गया है। विशेषज्ञ इसे स्टॉक मैनेजमेंट और डिजिटल सत्यापन का हिस्सा बता रहे हैं, लेकिन सड़कों पर विरोध की आवाजें तेज हो रही हैं।
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छोटे परिवारों पर सबसे ज्यादा असर
केंद्र सरकार के ताजा प्रस्ताव के तहत AAY लाभार्थियों को अब परिवार के कुल 35 किलो कोटे के बजाय 7.5 किलो प्रति व्यक्ति अनाज मिलेगा। चार सदस्यों वाले परिवार को पहले 35 किलो मिलता था, अब सिर्फ 30 किलो। पांच या अधिक सदस्यों वाले घरों को फायदा होगा, लेकिन छोटे परिवारों को 5 किलो तक की कमी झेलनी पड़ रही है। यह बदलाव NFSA (नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट) के तहत लागू हो रहा है, जिसका मकसद संसाधनों का बेहतर वितरण बताया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में APL श्रेणी के लाखों कार्डधारकों को आटे में 1 किलो की कटौती का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में परिवहन चुनौतियों के कारण स्टॉक की कमी का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोग इसे सरकारी लापरवाही बता रहे हैं।
e-KYC न होने पर राशन बंद
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली जैसे राज्यों में 31 जनवरी 2026 तक e-KYC न कराने वालों का राशन वितरण 1 फरवरी से बंद हो गया है। बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें उंगलियों के निशान और आंखों की स्कैनिंग शामिल है। लाखों लाभार्थी इसकी भनक तक न लगा सके, क्योंकि जागरूकता अभियान कमजोर रहा। दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली फूड सिक्योरिटी रूल्स 2026’ अधिसूचित कर सालाना आय सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर 1.2 लाख रुपये किया है, लेकिन e-KYC के बिना कोई राहत नहीं। सरकार का दावा है कि इससे जाली कार्ड और अपात्र लाभार्थी बाहर होंगे।
अपात्रों की लिस्ट साफ
बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान से आयकर भरने वाले, सरकारी नौकरीपेशा या चार पहिया वाहन रखने वालों के नाम कट रहे हैं। करोड़ों अपात्र लोग इस सुविधा से वंचित हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में गेहूं के साथ बाजरा या चावल का अनुपात बढ़ाया गया है, जिससे शुद्ध गेहूं की मात्रा घटी है। यह कदम बजट बचत और पोषण विविधीकरण का हिस्सा है, लेकिन गरीबों को महंगे बाजार पर निर्भर होना पड़ रहा है।
हेल्पलाइन और तारीखें चेक करें
- तत्काल नजदीकी राशन दुकान पर e-KYC करवाएं।
- हेल्पलाइन 1967 या NFSA पोर्टल (nfsa.gov.in) पर स्टेटस जांचें।
- अपने राज्य की फरवरी वितरण तारीखें ऐप या वेबसाइट से पता करें- दिल्ली: 10-20 फरवरी; यूपी: 5-25 फरवरी; हिमाचल: 15 फरवरी से शुरू।
विपक्षी नेता इसे ‘गरीब-विरोधी नीति’ बता रहे हैं, जबकि सरकार पारदर्शिता का दावा कर रही है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जागरूक रहें, क्योंकि मार्च तक और बदलाव संभव हैं।
















