देशभर के करोड़ों परिवारों के लिए राशन कार्ड अब खतरे की घंटी बन चुका है। हाल के महीनों में कई राज्यों में लाखों नाम कट चुके हैं, जिससे गरीब घरों में हड़कंप मच गया है। केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन कई लोग अनजाने में लाभ से वंचित हो रहे हैं। विशेष रूप से पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह मुद्दा गंभीर रूप ले चुका है। जागरूकता की कमी से बुजुर्ग और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
महंगाई के इस दौर में सस्ता अनाज जीवनरेखा है। अगर समय रहते ध्यान न दिया गया, तो पूरा परिवार परेशान हो सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर नाम क्यों कट रहे हैं और इसे कैसे रोका जाए।

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पहली बड़ी वजह, ई-केवाईसी में लापरवाही
ई-केवाईसी न कराने से सबसे ज्यादा कार्ड रद्द हो रहे हैं। सरकार ने इसे अनिवार्य बना दिया है ताकि फर्जी लाभार्थी बाहर हो सकें। आधार कार्ड से लिंकिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन के बिना राशन वितरण रुक जाता है। फरवरी 2026 तक का समय दिया गया था, लेकिन अब देरी बर्दाश्त नहीं।
कई परिवारों ने इसे अनदेखा किया, परिणामस्वरूप उनके नाम लिस्ट से गायब हो गए। ग्रामीण इलाकों में तकनीकी जागरूकता कम होने से समस्या बढ़ी है। साधारण मोबाइल पर भी यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है, फिर भी लाखों लोग चूक गए।
दूसरी बड़ी वजह, राशन न उठाने की आदत
लगातार तीन से छह महीने तक दुकान से अनाज न लेने वाले कार्ड निष्क्रिय हो जाते हैं। यह नियम वन नेशन वन राशन कार्ड योजना का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि जो लोग राशन नहीं लेते, वे जरूरतमंद नहीं।
इससे डुप्लिकेट या मृत सदस्यों के नाम भी अपने आप हट जाते हैं। पंजाब और पड़ोसी राज्यों में हजारों मामले इसी कारण सामने आए हैं। कभी-कभी परिवार के सदस्य शहर चले जाते हैं और भूल जाते हैं, लेकिन परिणाम भुगतने पड़ते हैं। नियमित रूप से दुकान जाना जरूरी है।
तीसरी बड़ी वजह, पात्रता नियमों का उल्लंघन
आवेदन में गलत जानकारी देना या परिवार की आर्थिक स्थिति बदल जाना बड़ा कारण है। शहरी क्षेत्रों में 100 वर्ग मीटर से बड़ा मकान, चार पहिया वाहन या ट्रैक्टर होने पर अपात्रता तय हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में भी आय सीमा पार करने पर कार्ड बंद।
सरकारी नौकरी या अच्छी कमाई होने पर भी जांच में पकड़े जाते हैं। फिजिकल सर्वे से घर-घर जाकर सत्यापन हो रहा है। झूठे दस्तावेजों का खुलासा होने पर तत्काल कार्रवाई होती है। यह कदम धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाया गया है।
नए नियमों का असर और चुनौतियां
जनवरी 2026 से आठ बड़े बदलाव लागू हुए, जिनमें डिजिटल वेरिफिकेशन, ओटीपी सिस्टम और मोबाइल लिंकिंग शामिल हैं। मृत्यु पर नाम स्वतः हटना और डुप्लिकेट कार्ड पर सजा का प्रावधान है। इससे सिस्टम मजबूत हुआ, लेकिन जागरूकता अभियान की कमी से ग्रामीणों को नुकसान।
उत्तर भारत के कई जिलों में 50 हजार से ज्यादा कार्ड प्रभावित हुए। पारदर्शिता तो बढ़ी, पर वास्तविक गरीबों को परेशानी हो रही। महंगाई में राशन बंद होना बजट पर भारी पड़ता है।
खुद को बचाने के सरल उपाय
तुरंत आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्टेटस जांचें। ई-केवाईसी के लिए आधार नंबर डालें या नजदीकी दुकान पर बायोमेट्रिक करवाएं। नियमित अनाज लें और परिवार के सभी सदस्यों का विवरण अपडेट रखें।
नाम कटने पर स्थानीय अधिकारी या हेल्पलाइन से अपील करें। मोबाइल ऐप डाउनलोड कर आसानी से ट्रैक करें। थोड़ी सजगता से लाखों का लाभ सुरक्षित रह सकता है। जागरूक रहें, परिवार को बचाएं।
















