
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दिल्ली एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान राफेल डील पर सारी आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “लोग कैसे आलोचना कर सकते हैं? यह आपके देश को मजबूत बनाता है, हमारे बीच रणनीतिक संबंध बढ़ाता है और भारत में नौकरियां पैदा करता है।” यह बयान उस समय आया जब रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हाल ही में 114 राफेल जेट्स की खरीद को मंजूरी दी, जो ‘मेक इन इंडिया’ को नई गति देगा
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सह-उत्पादन पर स्पष्टता
मैक्रों ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि भारत ने नई खेप के सह-उत्पादन की इच्छा जताई है, जिसमें स्वदेशी तकनीक मुख्य भूमिका निभाएगी। “हम हमेशा भारतीय घटकों की संख्या बढ़ा रहे हैं। कंपनी और आपकी सरकार के बीच यह संवाद का हिस्सा है। हम अधिकतम भारतीय कंपोनेंट्स और महत्वपूर्ण उपकरणों का भारत में निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आप हम पर भरोसा कर सकते हैं,” उन्होंने जोर देकर कहा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, डसॉल्ट एविएशन भारत में फ्यूजलेज उत्पादन और MRO सुविधाएं स्थापित करेगा, संभवतः हैदराबाद में टाटा के साथ साझेदारी में। इससे 60% स्वदेशीकरण का लक्ष्य है, हालांकि कुछ 80% की मांग कर रहे हैं ताकि इंजन-रडार तकनीकें हस्तांतरित हों।
वायुसेना की नई ताकत
यह डील भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाएगी। पहले से 36 राफेल मौजूद हैं, नौसेना के 26 के बाद कुल 176 हो जाएंगे। DAC ने 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस सौदे को ग्रीन सिग्नल दिया, जिसमें 96 जेट्स भारत में बनेंगे और 18 फ्रांस से आएंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली बैठक में P-8I विमान और मिसाइलें भी शामिल की गईं। चीन-पाकिस्तान सीमाओं पर यह रणनीतिक बढ़त देगा, साथ ही MRO लागत घटाएगा और भारत को वैश्विक निर्यात हब बना सकता है।
भारत-फ्रांस साझेदारी
मैक्रों ने भारत-फ्रांस संबंधों को “वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” करार दिया। “यह सिर्फ रक्षा नहीं, बल्कि पनडुब्बियां, इंजन, हेलीकॉप्टर और रखरखाव में सहयोग है। टाटा-एयरबस मॉडल की तर्ज पर आगे बढ़ेंगे,” उन्होंने कहा। समिट से इतर पीएम मोदी से मुलाकात में दोनों ने AI, रक्षा और व्यापार पर समझौते साइन किए, जिसमें हथौड़ा मिसाइल उत्पादन और H125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन शामिल है।
पीएम मोदी के G-7 दौरे का ऐलान
एक बड़ा ऐलान यह भी हुआ कि पीएम नरेंद्र मोदी जुलाई में फ्रांस की राजकीय यात्रा पर G-7 शिखर सम्मेलन के विशेष अतिथि होंगे। “हमारे द्विपक्षीय संबंध उच्चतम बिंदु पर हैं। ब्रिक्स अध्यक्ष के नाते मोदी जी आएंगे,” मैक्रों ने कहा। यह यात्रा रक्षा और AI सहयोग को नई ऊंचाई देगी।
रक्षा समीकरण में बदलाव
राफेल विवाद पुराना है, लेकिन मैक्रों ने इसे खारिज करते हुए आत्मनिर्भर भारत का समर्थन किया। आलोचक स्वदेशीकरण पर सवाल उठाते हैं, मगर 60% लक्ष्य से नौकरियां बढ़ेंगी और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित होगी । फ्रांस की यह छूट भारत को परिचालन संप्रभुता देगी, खासकर संघर्ष काल में। कुल मिलाकर, यह डील रक्षा समीकरण बदल रही है- भारत अब आयातक से निर्माता बनेगा।
















