
भारत सरकार की पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए वरदान साबित हो रही है। 2026 में भी सक्रिय इस योजना के तहत योग्य लाभार्थियों को ₹15,000 का टूलकिट प्रोत्साहन ई-वाउचर के रूप में मिल रहा है। यह राशि सीधे बैंक खाते में नहीं आती, बल्कि आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए विशेष वाउचर प्रदान किया जाता है, जो कारीगरों को आधुनिक तकनीक से लैस करने का सुनहरा अवसर देता है। योजना 2027-28 तक चलेगी, इसलिए अब भी समय है लाभ उठाने का।
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विश्वकर्मा योजना के प्रमुख लाभ
पीएम विश्वकर्मा योजना कारीगरों को न केवल आर्थिक सहायता बल्कि कौशल विकास का भी मंच प्रदान करती है। सबसे बड़ा लाभ है टूलकिट प्रोत्साहन – प्रशिक्षण पूरा करने पर ₹15,000 का ई-वाउचर, जिससे बढ़ई, दर्जी, बरबर, सुनार जैसे शिल्पकार उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण खरीद सकते हैं। इसके अलावा, प्रशिक्षण और वजीफा की सुविधा है: 5-7 दिनों का बुनियादी प्रशिक्षण और 15 दिनों का उन्नत प्रशिक्षण, जिसमें प्रतिदिन ₹500 का वजीफा मिलता है। कुल मिलाकर, प्रशिक्षण से ₹30,000 तक की कमाई संभव है।
बिना गारंटी लोन व्यवसाय विस्तार के लिए गेम-चेंजर है। पहली किस्त में ₹1 लाख और दूसरी में ₹2 लाख तक का ऋण मात्र 5% ब्याज दर पर उपलब्ध है, जो छोटे उद्यमियों के लिए क्रांति ला सकता है। साथ ही, लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड प्रदान किया जाता है, जो बाजार में विश्वसनीयता बढ़ाता है। ये लाभ न केवल व्यक्तिगत विकास सुनिश्चित करते हैं, बल्कि पारंपरिक हस्तशिल्प को वैश्विक पटल पर मजबूत बनाते हैं।
2026 में रजिस्ट्रेशन
आवेदन प्रक्रिया को 2026 में और आसान बनाया गया है। सबसे पहले, पीएम विश्वकर्मा आधिकारिक पोर्टल pmvishwakarma.gov.in पर जाएं या नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) का रुख करें। आधार e-KYC और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य है, इसलिए आधार कार्ड, लिंक्ड मोबाइल नंबर, बैंक विवरण और राशन कार्ड साथ ले जाएं।
चरणबद्ध तरीका:
- CSC पर फॉर्म भरें और ट्रेड चुनें।
- तीन चरणों में सत्यापन: ग्राम पंचायत/शहरी स्थानीय निकाय (ULB), जिला समिति और स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा जांच।
- सत्यापन सफल होने पर प्रशिक्षण के लिए कॉल लेटर।
- प्रशिक्षण पूरा करने पर ई-वाउचर और लोन स्वीकृति।
MyScheme पोर्टल myscheme.gov.in/schemes/pmv पर अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध है। देरी से बचें, क्योंकि सत्यापन में 15-30 दिन लग सकते हैं।
कौन ले सकता है लाभ?
हर इच्छुक कारीगर के लिए नहीं, बल्कि सख्त मानदंड हैं। आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। परिवार का केवल एक सदस्य ही लाभ ले सकता है। महत्वपूर्ण: पिछले 5 वर्षों में PMEGP, PM SVANidhi या Mudra लोन न लिया हो। सरकारी नौकरी वाले व्यक्ति और उनके परिवार अस्वीकृत हैं। यह सुनिश्चित करता है कि वास्तविक शिल्पकारों तक लाभ पहुंचे।
18 पारंपरिक व्यवसाय शामिल
योजना 18 निर्धारित ट्रेड्स पर केंद्रित है:
- निर्माण क्षेत्र: बढ़ईगिरी, राजमिस्त्री, कुम्हार।
- सेवा क्षेत्र: दर्जी, धोबी, बरबर।
- धातु कार्य: लोहार, सुनार, चांदीकार।
- अन्य: चित्रकार, मूर्तिकार, कालीन बुनकर आदि।
पूर्ण सूची आधिकारिक पोर्टल पर देखें। यदि आपका व्यवसाय इनमें आता है, तो आज ही आवेदन करें!
लाखों कारीगरों की उम्मीद
2026 तक लाखों ने लाभ उठाया है, लेकिन अभी भी करोड़ों पात्र हैं। सरकार का लक्ष्य पारंपरिक कला को डिजिटल युग से जोड़ना है। देरी न करें – CSC जाएं, रजिस्टर करें और आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा बनें। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन 14437 पर कॉल करें। यह योजना न केवल ₹15,000 का वाउचर, बल्कि नई जिंदगी का तोहफा है!
















