
केंद्र सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़ी पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम राहत योजना (PM RAHAT – Road Accident Victim Hospitalisation and Assured Treatment) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत सड़क हादसे में घायल लोगों को दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह योजना देश की किसी भी कैटेगरी की सड़क पर हुई दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित पर लागू होगी। यानी राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग या ग्रामीण सड़क किसी भी स्थान पर हादसा होने पर घायल व्यक्ति इस सुविधा का लाभ उठा सकेगा।
फरवरी 2026 में लॉन्च हुई यह योजना सड़क हादसों की भयावह स्थिति को देखते हुए एक क्रांतिकारी कदम है। स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रतिवर्ष 1.5 लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत मौतें समय पर इलाज न मिलने के कारण होती हैं। पीएम राहत योजना का मुख्य लक्ष्य ‘गोल्डन आवर’ में इलाज सुनिश्चित करना है, जहां दुर्घटना के पहले घंटे में अस्पताल पहुंचाने से जान बचने की संभावना दोगुनी हो जाती है। योजना मोटर वाहन दुर्घटना कोष से फंडेड है, जिसमें अस्पताल सीधे भुगतान प्राप्त करेंगे, बिना मरीज से एक पैसा लिए।
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पात्रता और कवरेज के नियम
पीएम राहत योजना के तहत केवल गंभीर रूप से घायल व्यक्ति, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़े, ही पात्र हैं। मामूली चोटों या OPD उपचार पर लागू नहीं। दुर्घटना के 24 घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचना अनिवार्य है। प्रति पीड़ित अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का पैकेज कवरेज मिलेगा। गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे तक स्टेबलाइजेशन इलाज, जबकि गंभीर (लाइफ-थ्रेटनिंग) केस में 48 घंटे तक विस्तार संभव है। इसके बाद भी 7 दिनों तक कैशलेस इलाज जारी रहेगा। कोई आय प्रमाण पत्र, बीमा पॉलिसी या अन्य दस्तावेज की जरूरत नहीं।
डिजिटल प्रक्रिया और पुलिस सत्यापन
योजना पूरी तरह डिजिटल है। eDAR (Electronic Detailed Accident Report) पोर्टल पर पुलिस दुर्घटना विवरण दर्ज करेगी, जबकि TMS-2.0 (Transaction Management System) से स्वास्थ्य विभाग भुगतान संभालेगा। स्थानीय पुलिस द्वारा लाए गए पीड़ितों को तुरंत eDAR ID मिलेगी। गैर-गंभीर केस में 24 घंटे और गंभीर में 48 घंटे के अंदर पुलिस पुष्टि जरूरी। 112 इमरजेंसी हेल्पलाइन को इंटीग्रेट किया गया है, जहां राहगीर या कोई भी व्यक्ति कॉल कर एंबुलेंस और नजदीकी नामित अस्पताल की जानकारी ले सकता है। अस्पताल पोर्टल पर पंजीकरण कर इलाज शुरू करेंगे और क्लेम खुद प्रोसेस करेंगे।
गोल्डन आवर पर विशेष जोर
रिसर्च बताती है कि गोल्डन आवर में इलाज से 50% मौतें टल सकती हैं। योजना इसी कमी को पूरा करती है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने 112 को IRS-1112 सिस्टम से जोड़ा है। दुर्घटना स्पॉट पर मौजूद कोई भी 112 डायल कर सहायता मंगा सकता है। दिल्ली, राजस्थान समेत कई राज्य इसे लागू कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल जानें बचेंगी, बल्कि परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।
चुनौतियां और भविष्य
हालांकि योजना सराहनीय है, सफलता अस्पतालों के नेटवर्क, पुलिस सत्यापन की स्पीड और जागरूकता पर निर्भर करेगी। जिला स्तर पर प्रशिक्षण और अधिक नामित अस्पताल जोड़ने की जरूरत है। आने वाले महीनों में इसका असर साफ दिखेगा। पीएम मोदी की इस पहल से सड़क सुरक्षा को नया आयाम मिलेगा।
















