
ग्रामीण भारत के किसानों और युवा उद्यमियों के लिए एक बड़ी राहत! पशुपालन और डेयरी फार्मिंग शुरू करने के इच्छुक लोगों को अब बिना किसी संपत्ति गिरवी रखे (कॉलेटरल-फ्री) ₹5 लाख तक का लोन मिलना आसान हो गया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) और पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी सरकारी स्कीमों ने इस क्षेत्र में क्रांति ला दी है। बजट 2025-26 के तहत KCC की बिना गारंटी सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया गया है, जिससे छोटे पशुपालक अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
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योजना का विवरण
यह सुविधा नाबार्ड और विभिन्न बैंकों द्वारा संचालित है, जो गाय-भैंस खरीद, शेड निर्माण और दूध उत्पादन इकाई स्थापना के लिए डिजाइन की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दूध की बढ़ती मांग के बीच यह लोन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। किशोर श्रेणी के तहत मुद्रा योजना में ₹50,001 से ₹5 लाख तक का ऋण बिना प्रोसेसिंग फीस के उपलब्ध है, जबकि पुनर्भुगतान अवधि 3-5 वर्ष की है। सामान्यतः ₹1.60 लाख तक का लोन पूरी तरह बिना सुरक्षा के स्वीकृत होता है, जो SC/ST और महिलाओं के लिए सब्सिडी के साथ और आकर्षक बन जाता है।
आवेदन की सरल चरणबद्ध प्रक्रिया
सबसे आसान तरीका अपनाते हुए कोई भी इच्छुक व्यक्ति नजदीकी सरकारी बैंक जैसे SBI (sbi.bank.in), PNB या निजी बैंक HDFC की शाखा में जा सकता है। सबसे पहले दस्तावेज तैयार करें: आधार कार्ड, पैन कार्ड, निवास प्रमाण (बिजली बिल या राशन कार्ड), पिछले 6 महीनों का बैंक स्टेटमेंट और पशुपालन का संक्षिप्त बिजनेस प्लान (प्रोजेक्ट रिपोर्ट)। बैंक से मुद्रा लोन या पशुपालन KCC फॉर्म लें, भरें और दस्तावेज संलग्न कर जमा करें।
बैंक अधिकारी प्रोजेक्ट सत्यापन और स्थल निरीक्षण करेंगे, जो सामान्यतः 5-15 दिनों में पूरा होता है। सफल होने पर राशि सीधे खाते में ट्रांसफर हो जाती है। ऑनलाइन विकल्प के लिए mudra.org.in या nabard.org पर भी आवेदन संभव है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बिजनेस प्लान में 5-10 पशुओं की इकाई, अनुमानित लागत (₹2-3 लाख प्रति गाय) और आय अनुमान (मासिक ₹20,000+) स्पष्ट रखें।
सब्सिडी और आर्थिक लाभ
नाबार्ड की डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत सामान्य वर्ग को 25% और SC/ST को 33-35% तक सब्सिडी मिलती है। उदाहरणस्वरूप, ₹3 लाख के लोन पर ₹75,000-1 लाख की छूट संभव है। सरकारी बैंकों में ब्याज दरें 4-7% हैं, जो निजी संस्थानों से कहीं कम हैं। समय पर किस्त चुकाने पर अतिरिक्त छूट भी। इससे न केवल आय बढ़ेगी, बल्कि रोजगार सृजन होगा। उत्तर प्रदेश की ‘गोपालक योजना’ या राजस्थान की क्रेडिट कार्ड स्कीम जैसे राज्य-स्तरीय कार्यक्रम अतिरिक्त लाभ देते हैं, जहां स्थानीय पशु विभाग सब्सिडी को और बढ़ाते हैं।
चुनौतियां और सलाह
हालांकि प्रक्रिया सरल है, लेकिन क्रेडिट हिस्ट्री और न्यूनतम अनुभव जरूरी। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना प्लानिंग के लोन न लें, क्योंकि दूध बाजार की अस्थिरता जोखिम पैदा कर सकती है। NABARD के अनुसार, 2025 में 50 लाख से अधिक पशुपालकों ने लाभ उठाया। युवा उद्यमी मोबाइल ऐप्स से ट्रैकिंग कर सकते हैं।
















