
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जोड़ा बैल योजना छोटे व सीमांत किसानों के लिए संजीवनी बन चुकी है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत संचालित यह पहल पारंपरिक खेती को पुनर्जनन दे रही है, खासकर आदिम जनजाति समुदायों के लिए। महंगे ट्रैक्टरों के दौर में बैलों की जोड़ी से कम लागत वाली खेती संभव हो रही है, जिससे उत्पादन खर्च घटकर लाभ दोगुना हो रहा है।
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पारंपरिक खेती को नई जान
पारंपरिक खेती में बैलों की भूमिका आज भी अपरिहार्य है। छोटे जोत वाले किसान, जो ट्रैक्टर खरीदने का सपना भी नहीं देख सकते, अब सरकार की इस योजना से सशक्त हो रहे हैं। उद्देश्य साफ है- आदिवासी किसानों को कृषि कार्यों में आत्मनिर्भर बनाना, जुताई-बुवाई जैसे कार्यों को सस्ता करना और उनकी आय में इजाफा। पलामू जैसे दूरदराज जिलों में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मजबूत कर रही है। जिला पशुपालन पदाधिकारी प्रभाकर सिन्हा ने बताया, “यह योजना जीरो बजट फार्मिंग को बढ़ावा देती है, गोबर से जैविक खाद मिलने से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।”
योजना की अनोखी खासियतें
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता 90 प्रतिशत सब्सिडी है। एक जोड़ी बैल की कुल लागत ₹40,000 तय की गई है, जिसमें सरकार ₹36,000 वहन करती है। लाभुक किसान को केवल ₹4,000 का न्यूनतम अंशदान देना होता है। यह राशि सीधे सप्लायर एजेंसी के खाते में जाती है या किसान के खाते में ट्रांसफर होती है। राज्य सरकार द्वारा चयनित एजेंसी ही बैल उपलब्ध कराएंगी, ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित हो।
बैलों की आयु 2-3 वर्ष, स्वस्थ, रोगमुक्त और पूर्ण टीकाकृत होना अनिवार्य है। जिला पशु चिकित्सक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी करता है। योजना केवल छोटे/सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर तक जोत) के लिए है, जिनके पास तहसील स्तर का प्रमाणपत्र हो।
पशु स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान
सरकार बैल उपलब्ध कराकर नहीं रुकती। मुफ्त टीकाकरण सभी पशुओं का कराया जाता है, ताकि खुरपा, लंगड़ा जैसे रोगों से सुरक्षा मिले। साथ ही बीमा सुविधा अनिवार्य है, जिससे किसी दुर्घटना में किसान को आर्थिक क्षति न हो। यह दोहरा सुरक्षा कवच किसानों में विश्वास जगाता है। पलामू में अब तक दर्जनों किसान लाभान्वित हो चुके हैं।
पलामू में लक्ष्य और आवेदन प्रक्रिया
वित्तीय वर्ष 2025-26 में पलामू जिले को 47 लाभुकों का लक्ष्य मिला है। पूरे झारखंड में गढ़वा (41), चतरा (38), हजारीबाग (50) समेत जिलों में वितरण हो रहा। आवेदन सरल: ग्राम सभा से अनुशसा लें, फॉर्म प्रखंड कार्यालय में जमा करें। चयन समिति जिला पशुपालन अधिकारी की अगुवाई में लाभार्थी चुनती है। योग्य किसान स्थानीय पशुपालन कार्यालय से संपर्क कर आवेदन शुरू कर सकते हैं।
यह योजना आदिवासी किसानों के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम बन रही है। कम लागत, सरकारी सहायता, स्वास्थ्य-बीमा जैसी सुविधाएं ग्रामीण भारत को सशक्त कर रही हैं। भजनलाल सरकार की यह सौगात पारंपरिक खेती को आधुनिक आय का आधार बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मिट्टी संरक्षण और जैविक खेती को बल मिलेगा। पलामू के किसान रामेश्वर राम ने कहा, “₹4,000 में बैल जोड़ी मिलना सपना साकार हुआ। अब खेती बिना कर्ज के!”
















