
उत्तर प्रदेश के तराई और पूर्वांचल क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी खलीलाबाद-बहराइच नई रेल लाइन परियोजना (Khalilabad-Bahraich New Railway Line Project) अब धरातल पर तेज़ी से आकार ले रही है, लगभग 240.26 किलोमीटर लंबी इस ब्रॉड गेज (Broad Gauge) रेल लाइन का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है, क्योंकि इस मार्ग में आने वाले 5 प्रमुख जिलों में भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर और बजट: ₹4,940 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट
इस महत्वपूर्ण रेल लिंक को पूर्वोत्तर रेलवे (North Eastern Railway – NER) द्वारा विकसित किया जा रहा है। आम बजट 2026 में इस परियोजना को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
- कुल अनुमानित लागत: लगभग ₹4,939.78 करोड़ (करीब 5,000 करोड़ रुपये)।
- कुल लंबाई: 240.26 किलोमीटर।
- स्टेशनों की संख्या: इस रूट पर कुल 16 क्रॉसिंग स्टेशन और 12 हॉल्ट स्टेशन समेत कुल 32 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
इन 5 जिलों की बदलेगी सूरत
यह रेल लाइन उत्तर प्रदेश के 5 जिलों से होकर गुजरेगी, जिनमें से 4 ‘आकांक्षी जिले’ (Aspirational Districts) हैं:
- संतकबीरनगर (खलीलाबाद)
- सिद्धार्थनगर (बांसी, डुमरियागंज)
- बलरामपुर (उतरौला)
- श्रावस्ती (भिनगा, एकौना)
- बहराइच
सिद्धार्थनगर जिले की बांसी और डुमरियागंज तहसील के 85 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति दी गई है। प्रशासन द्वारा किसानों को मुआवजे के वितरण और जमीन के हस्तांतरण का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
तीन चरणों में पूरा होगा निर्माण कार्य (Phase-wise Development)
रेलवे ने इस विशाल प्रोजेक्ट को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए इसे तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया है:
- प्रथम चरण (Phase 1): खलीलाबाद से बांसी तक (लंबाई: 54.40 किमी)। इस खंड पर मिट्टी भराई और ट्रैक बिछाने की तैयारी सबसे आगे है।
- द्वितीय चरण (Phase 2): बांसी से एकौना तक (लंबाई: 119 किमी)। यह परियोजना का सबसे लंबा हिस्सा है जो सिद्धार्थनगर और श्रावस्ती को जोड़ेगा।
- तृतीय चरण (Phase 3): एकौना से बहराइच तक (लंबाई: 66.60 किमी)। इसके पूरा होते ही बहराइच सीधे खलीलाबाद और गोरखपुर रूट से जुड़ जाएगा।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट (Tourism & Economy)
यह रेल लाइन न केवल परिवहन को सुगम बनाएगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) के लिए गेम-चेंजर साबित होगी:
- बौद्ध सर्किट: भगवान बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती पहली बार सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ेगी।
- शक्तिपीठ: बलरामपुर के प्रसिद्ध देवी पाटन मंदिर (तुलसीपुर) तक पहुंच आसान हो जाएगी।
- रोजगार: निर्माण के दौरान लगभग 57.67 लाख मानव दिवस (Man-days) के बराबर प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
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प्रोजेक्ट टाइमलाइन और वर्तमान स्थिति
रेलवे विभाग और स्थानीय प्रशासन के दावों के अनुसार, इस परियोजना को 2026-2027 तक पूर्ण रूप से चालू करने का लक्ष्य रखा गया है, वर्तमान में सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर के हिस्सों में सॉइल फिलिंग (Soil Filling) और स्टेशन टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
















