
अगर आप भी टैक्स बचाने के लिए अपने माता-पिता या किसी करीबी रिश्तेदार को किराया (Rent) देते हैं, तो अब आपको और अधिक सतर्क होने की जरुरत है, केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के तहत, 1 अप्रैल 2026 से हाउस रेंट अलाउंस (HRA) क्लेम करने के नियमों में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, अब केवल रेंट रसीद या पैन कार्ड देना काफी नहीं होगा, बल्कि मकान मालिक के साथ अपना ‘रिलेशन’ (रिश्ता) भी सार्वजनिक करना होगा।
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क्या है नया नियम?
नए नियमों के अनुसार, यदि आपका सालाना किराया 1 लाख रुपये से अधिक है, तो आपको अपने नियोक्ता (Employer) को दिए जाने वाले डिक्लेरेशन में मकान मालिक के साथ अपने संबंध की जानकारी देना अनिवार्य होगा, इसके लिए मौजूदा ‘फॉर्म 12BB’ की जगह ‘फॉर्म 124’ का उपयोग किया जाएगा।
इन बातों का रखना होगा विशेष ध्यान
टैक्स चोरी और फर्जी रेंट दावों को रोकने के लिए विभाग अब डेटा एनालिटिक्स का सहारा लेगा नियमों का पालन न करने पर आपकी फाइल रद्द हो सकती है और भारी जुर्माना भी लग सकता है।
- आपको स्पष्ट करना होगा कि मकान मालिक आपका माता-पिता, पति/पत्नी, भाई-बहन या कोई अन्य रिश्तेदार है।
- किराए का भुगतान नकद (Cash) के बजाय चेक, यूपीआई या नेट बैंकिंग के जरिए करें ताकि डिजिटल सबूत रहे।
- जिस रिश्तेदार को आप किराया दे रहे हैं, उनके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में उस किराये की आय का उल्लेख होना अनिवार्य है।
- विभाग यह भी जांच सकता है कि क्या मकान वास्तव में उस रिश्तेदार के नाम पर है या नहीं।
- आपको यह साबित करना पड़ सकता है कि आप वास्तव में उस पते पर रह रहे हैं।
लापरवाही पड़ सकती है भारी
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जानकारी गलत पाई जाती है या इसे आय को गलत तरीके से पेश करना (Misreporting) माना जाता है, तो टैक्स की चोरी पर 200% तक की पेनल्टी लगाई जा सकती है, यह नया सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमेटेड होगा, जिससे पैन-टू-पैन डेटा मैचिंग के जरिए गड़बड़ी पकड़ना आसान हो जाएगा।
टैक्स बचाने के लिए परिवार के भीतर रेंट अरेंजमेंट अभी भी वैध है, लेकिन अब इसके लिए कागजी औपचारिकताएं और पारदर्शिता पहले से कहीं अधिक जरुरी हो गई हैं।
















