भारत के खेतों में अब ड्रोन की गूंज सुनाई देगी और उन्हें उड़ाएंगी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं। केंद्र सरकार की नमो ड्रोन दीदी योजना ने कृषि क्रांति को नई ऊंचाई दे दी है। इसका मकसद स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ड्रोन की ताकत सौंपकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। दो साल की इस मुहिम में देशभर के 15,000 से ज्यादा समूहों को आधुनिक ड्रोन सौंपे जाएंगे। इससे न सिर्फ महिलाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि किसानों को भी सस्ती और तेज सेवा उपलब्ध होगी।

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योजना की शुरुआत और लक्ष्य
यह पहल 2023 के अंत में शुरू हुई जब प्रधानमंत्री ने इसे देश को समर्पित किया। ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालयों के संयुक्त प्रयास से चल रही यह स्कीम विशेष रूप से महिलाओं को लक्षित करती है। मुख्य फोकस तरल खाद और दवाओं का हवाई छिड़काव है जो पारंपरिक तरीकों से कहीं ज्यादा कुशल है। एक ड्रोन दिन भर में 20 एकड़ जमीन कवर कर सकता है। महिलाएं इन्हें किराए पर देकर अच्छी कमाई करेंगी। सरकारी मदद से ड्रोन का बड़ा हिस्सा सब्सिडी पर मिलेगा जिससे आर्थिक बोझ कम रहेगा।
क्या मिलेगा ड्रोन पैकेज में?
चयनित समूहों को ड्रोन के साथ पूरा सामान दिया जाता है। इसमें मुख्य ड्रोन के अलावा चार अतिरिक्त बैटरी सेट, प्रोपेलर, नोजल, तेज चार्जर और ले जाने का बॉक्स शामिल रहता है। ऊपर से 15 दिनों की मुफ्त ट्रेनिंग भी जो ड्रोन उड़ाने और खेती के इस्तेमाल सिखाती है। ट्रेनिंग खत्म होते ही 15,000 रुपये का भुगतान हो जाता है। एक साल का बीमा और दो साल की मरम्मत सेवा भी पैकेज का हिस्सा है। इससे महिलाएं बेफिक्र होकर काम कर सकती हैं। एक सदस्य ने कहा, पहले मजदूरी करते थे अब हम खेतों पर राज कर रहे हैं।
कौन बन सकता है हिस्सा?
सिर्फ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला समूह ही आवेदन कर सकते हैं। ग्रामीण इलाकों के सक्रिय समूहों को प्राथमिकता मिलती है जहां खेती का काम ज्यादा हो। राज्य स्तर की कमिटी क्षेत्र चिन्हित करके समूह चुनती है। किसानों की मांग और आर्थिक संभावना को आधार बनाया जाता है। व्यक्तिगत आवेदन नहीं चलेंगे सब कुछ समूह आधारित है। पंजाब जैसे धान-गेहूं बेल्ट वाले राज्यों में यह योजना खासतौर पर उपयोगी साबित हो रही है।
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आवेदन कैसे करें आसान तरीके से
स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या जिला मिशन कार्यालय से संपर्क करें। ऑनलाइन पोर्टल पर समूह का पंजीकरण करवाएं। चयन प्रक्रिया पारदर्शी है जिसमें खाद कंपनियों और विशेषज्ञ शामिल होते हैं। एक बार ड्रोन मिलने के बाद निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम काम करता है। लाइव ट्रैकिंग से हर उड़ान का हिसाब रखा जाता है। पंजाब में कई समूह पहले ही सक्रिय हो चुके हैं और किसानों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
प्रगति और भविष्य की संभावनाएं
पिछले दो सालों में सैकड़ों ड्रोन वितरित हो चुके हैं। दक्षिणी राज्य आगे हैं लेकिन उत्तर भारत भी तेजी पकड़ रहा है। इससे खेती में समय और मेहनत की बचत हो रही है। महिलाओं को नई स्किल मिलने से परिवार की आय बढ़ी है। चुनौतियां हैं जैसे जागरूकता की कमी और रखरखाव लेकिन सरकारी सपोर्ट से ये हल हो रही हैं। 2026 तक पूरा लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा कदम है।
महिलाओं का नया दौर
नमो ड्रोन दीदी सिर्फ मशीन नहीं बल्कि सपनों को पंख दे रही है। लुधियाना की एक महिला ने बताया कि ड्रोन से उनकी जिंदगी बदल गई। अब वे न सिर्फ कमाती हैं बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं। सरकार का यह प्रयास कृषि को तकनीकी युग में ले जा रहा है। इच्छुक समूह आज ही आगे आएं और इस मौके को लपक लें। भारत का ग्रामीण आकाश अब महिलाओं का है।
















