
महानगरों की भागदौड़, प्रदूषण और सीमित नौकरी से परेशान युवाओं के लिए अब गांव ‘गोल्डमाइन’ साबित हो रहे हैं, अपनी माटी से जुड़कर मोटी कमाई करने का सपना अब हकीकत में बदल रहा है, केंद्र और राज्य सरकारें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कमर कस चुकी हैं, जिससे गाँव में बिजनेस शुरु करना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और मुनाफे वाला सौदा बन गया है।
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इन ‘देसी’ बिजनेस में है जबरदस्त कमाई
गाँव की अपनी ज़मीन पर आप ऐसे कई स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं जिनकी मांग शहरों में आसमान छू रही है:
- डेयरी और पशुपालन: दूध, घी और पनीर की बढ़ती डिमांड के चलते डेयरी फार्मिंग एक ‘सदाबहार’ मुनाफे का सौदा है।
- ऑर्गेनिक फार्मिंग (जैविक खेती): रसायनों से डरे हुए शहरी लोग अब सीधे खेतों से ऑर्गेनिक सब्जियां और अनाज खरीदना पसंद कर रहे हैं।
- फूड प्रोसेसिंग यूनिट: गाँव में ही अचार, पापड़, मसालों या तेल की मिनी मिल लगाकर आप ब्रांडेड कंपनियों को टक्कर दे सकते हैं।
- मशरूम और मधुमक्खी पालन: कम जगह और कम लागत में शुरू होने वाले ये बिजनेस बहुत कम समय में निवेश की रकम वापस दिला देते हैं।
सरकार भी बनी पार्टनर: मिल रही है भारी सब्सिडी
बिजनेस शुरू करने के लिए अब पैसों की चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिए वित्तीय मदद मुहैया करा रही है:
- PMEGP (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम): इसके तहत ग्रामीण इलाकों में नया उद्योग लगाने पर सरकार 25% से 35% तक की सब्सिडी दे रही है। विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध है।
- मुद्रा योजना (Mudra Loan): छोटे व्यवसायों के लिए बिना गारंटी 10 लाख रुपये तक का लोन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
- ट्रेनिंग और स्किलिंग: ग्रामीण उद्यमी कौशल विकास योजना के तहत सरकार बिजनेस मैनेजमेंट और तकनीकी ट्रेनिंग भी फ्री में दे रही है।
गाँव में बिजनेस करने के ‘सुपर फायदे’
शहरों के मुकाबले गाँव में बिजनेस करने के कई प्लस पॉइंट्स हैं, यहाँ न तो आपको भारी-भरकम किराया देना है और न ही लेबर की कमी है। कच्चा माल सीधे खेत से मिलता है, जिससे उत्पादन लागत कम रहती है और मुनाफे का मार्जिन बढ़ जाता है।
यदि आपके पास गाँव में अपनी ज़मीन है, तो उसे खाली न छोड़ें, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खुद का ‘विलेज स्टार्टअप’ शुरू करें और नौकरी मांगने वाले के बजाय नौकरी देने वाले बनें।
















