
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निवासियों के लिए सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है, शहर के तेजी से बढ़ते उत्तरी क्षेत्र और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने एक और ठोस कदम उठा दिया है, वसंत कुंज से आईआईएम (IIM) रोड तक प्रस्तावित नए मेट्रो कॉरिडोर के लिए आधिकारिक तौर पर सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है।
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जाम से मिलेगी मुक्ति, छात्रों के लिए बनेगी लाइफलाइन
यह नया 10 किलोमीटर लंबा रूट न केवल शहर के उत्तरी हिस्से में यातायात के दबाव को कम करेगा, बल्कि आईआईएम लखनऊ और आसपास के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के हजारों छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के लिए एक ‘लाइफलाइन’ साबित होगा, लंबे समय से इस क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी की मांग की जा रही थी, जिसे अब अमली जामा पहनाया जा रहा है।
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर: चारबाग से वसंत कुंज तक का खाका
लखनऊ मेट्रो का फेज-1B (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) अब धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है, इस कॉरिडोर की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- रूट और लंबाई: यह कॉरिडोर चारबाग रेलवे स्टेशन को वसंत कुंज से जोड़ेगा, जिसकी कुल लंबाई 11.16 किलोमीटर होगी।
- स्टेशनों की सूची: इस मार्ग पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें 7 भूमिगत (Underground) और 5 एलिवेटेड (Elevated) होंगे।
- भूमिगत स्टेशन: चारबाग, गौतम बुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल कॉलेज चौराहा और निवाजगंज।
- एलिवेटेड स्टेशन: ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, मूसाबाग और वसंत कुंज।
- कनेक्टिविटी: यह रुट पुराने लखनऊ के घने इलाकों जैसे अमीनाबाद, चौक और ठाकुरगंज को मेट्रो मैप पर लाएगा, जिससे लोगों का सफर मिनटों में पूरा हो सकेगा।
बजट और निर्माण की समय-सीमा
परियोजना को गति देने के लिए वित्तीय और तकनीकी मंजूरियां मिल चुकी हैं:
- कुल लागत: इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹5,801.05 करोड़ है।
- बजट आवंटन: केंद्रीय बजट 2026-27 में इस फेज के लिए ₹1,450 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- विदेशी ऋण: न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) से ₹2,883.93 करोड़ के कर्ज को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।
- कार्य का प्रारंभ: निर्माण कार्य फरवरी-मार्च 2026 के बीच शुरू होने की प्रबल संभावना है, जिसे अगले 5 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है।
UPMRC ने ‘AYESA’ को विस्तृत डिजाइन सलाहकार (DDC) नियुक्त किया है, जो इस कॉरिडोर के सिविल और आर्किटेक्चरल डिजाइन का काम देख रही है, इस विस्तार के बाद लखनऊ मेट्रो की दैनिक यात्री क्षमता (Ridership) 3 लाख के पार पहुंचने की उम्मीद है।
















