
बड़े शहरों में किराए पर रहने वाले लाखों लोगों की सबसे बड़ी चिंता अब खत्म होने वाली है। मकान मालिकों द्वारा अचानक और मनमाने ढंग से किराया बढ़ाने की प्रथा पर 2026 के नए रेंट नियमों ने सख्त लगाम लगा दी है। मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों में जहां किराया पहले से ही आय का बड़ा हिस्सा खा जाता है, वहां ये नियम किरायेदारों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट के अपडेटेड वर्जन और राज्य-स्तरीय कानूनों के तहत अब मकान मालिक सालाना अधिकतम 5-10% ही किराया बढ़ा सकते हैं, वो भी लिखित नोटिस के साथ।
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एग्रीमेंट की अहमियत
जब कोई व्यक्ति किराए पर मकान लेता है, तो एग्रीमेंट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। अगर 11 महीने या एक साल के लिए किया गया रेंट एग्रीमेंट में किराया वृद्धि की कोई शर्त नहीं है, तो उस अवधि में मालिक बिल्कुल नहीं बढ़ा सकता। एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से 10% सालाना बढ़ोतरी लिखी हो, तभी वैध मानी जाती है। बिना ऐसी शर्त के कोई भी वृद्धि अवैध है, और किरायेदार कोर्ट जा सकता है। ऊपर दी गई जानकारी के अनुसार, 2026 नियमों में 90 दिन पहले लिखित नोटिस अनिवार्य कर दिया गया है, वरना बढ़ोतरी रद्द हो जाती है।
राज्यवार किराया वृद्धि के सख्त नियम
भारत में किराया नियंत्रण राज्य स्तर पर लागू होता है, लेकिन मॉडल टेनेंसी एक्ट सभी के लिए गाइडलाइन है। महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट (2000) के तहत मकान मालिक सालाना सिर्फ 4% तक बढ़ा सकते हैं। अगर संपत्ति में बड़ा मरम्मत कार्य हुआ हो, तो 15% लागत के आधार पर अतिरिक्त वृद्धि संभव है, लेकिन कुल सीमा पार नहीं होनी चाहिए। दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट (2009) में सीमा 7% है, और नोटिस के बिना कोई बदलाव गैर-कानूनी।
2026 के नए बदलावों ने इसे और सख्त किया है। अब पूरे देश में डिपॉजिट अधिकतम 2 महीने का ही मान्य है। मनमानी वृद्धि पर रेंट ट्रिब्यूनल में शिकायत करने पर मालिक को जुर्माना और पुराना किराया लौटाना पड़ सकता है। उदाहरणस्वरूप, अगर 20,000 रुपये का किराया 30,000 कर दिया जाए, तो किरायेदार एग्रीमेंट, रसीदें दिखाकर केस जीत सकता है। ये नियम खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में उपयोगी हैं, जहां किरायेदार अक्सर शोषित होते हैं।
मनमानी रोकने के 3 सुनहरे नियम
किरायेदार इन तीन नियमों से खुद को बचा सकते हैं:
- लिखित एग्रीमेंट और नोटिस: हर समझौता रजिस्टर्ड हो, जिसमें वृद्धि % तय हो। 60-90 दिन का नोटिस न मिले तो भुगतान न करें।
- सीमा का पालन: 5-10% से ज्यादा पर तुरंत शिकायत। ट्रिब्यूनल मुफ्त सुनवाई करता है।
- डिपॉजिट सुरक्षा: 2 महीने से ज्यादा न दें, और बिना कारण रिफंड रोकना अपराध।
| शहर | सालाना वृद्धि सीमा | नोटिस पीरियड |
|---|---|---|
| दिल्ली | 7% | 90 दिन |
| मुंबई | 4% | 60 दिन |
| अन्य राज्य | 5-10% | 90 दिन |
शिकायत का आसान तरीका
समस्या हो तो स्थानीय रेंट कंट्रोलर या कंज्यूमर फोरम जाएं। सबूत जैसे एग्रीमेंट, पेमेंट रिकॉर्ड रखें। 2026 से डिजिटल पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भी संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये नियम किरायेदारों को सशक्त बनाएंगे, मकान मालिकों को अनुशासित। किरायेदारों से अपील है- एग्रीमेंट साइन करने से पहले वकील से सलाह लें। ये बदलाव न केवल बजट बचाएंगे, बल्कि रहन-सहन को सुरक्षित बनाएंगे।
















