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यूपी के शहरों को जाम से मिलेगी आजादी! बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पूरा; किसानों के खाते में पहुँचा करोड़ों का मुआवजा।

ट्रैफिक जाम से तंग? यूपी सरकार ने कमाल कर दिया! बाईपास बनने से मेरठ, आजमगढ़, आगरा जैसे शहर जाम-मुक्त। किसानों को मोटा मुआवजा मिला, प्रोजेक्ट्स तेज। व्यापार बूम, रोजगार दौड़ेगा – अभी पढ़ें पूरी गहराई!

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उत्तर प्रदेश में सड़कें अब तेज रफ्तार पकड़ रही हैं। राज्य के कई शहरों में बाईपास निर्माण की कवायद तेज हो गई है, जहां जमीन अधिग्रहण पूरा हो चुका है। किसानों के खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर हो गए, जिससे प्रोजेक्ट में तेजी आई है। इन बाईपास से शहरों के बीचोंबीच लगने वाले ट्रैफिक जाम खत्म हो जाएंगे। व्यापार बढ़ेगा, दुर्घटनाएं कम होंगी और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। सरकार का यह कदम यूपी को ट्रैफिक-मुक्त हाईवे नेटवर्क की ओर ले जा रहा है।

यूपी के शहरों को जाम से मिलेगी आजादी! बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पूरा; किसानों के खाते में पहुँचा करोड़ों का मुआवजा।

बाईपास: शहरों की ट्रैफिक मर्ज की दवा

शहरों में भारी वाहनों का अंदर घुसना ही जाम का सबसे बड़ा कारण रहा है। अब बाईपास बनने से ट्रक और बसें शहर बाहर ही चक्कर लगा लेंगी। मेरठ-हापुड़ जैसे व्यस्त रास्तों पर यह बदलाव सबसे पहले दिखेगा। इसी तरह पूर्वी यूपी के शहरों में रिंग रोड स्टाइल बाईपास शहर को घेरेंगे। गोंडा और आगरा के इलाकों में भी नहर किनारे या उत्तरी हिस्से में नई सड़कें बन रही हैं। इनसे लोकल बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी। किसान अपनी फसल मंडी तक बिना रुकावट ले जा सकेंगे। कुल मिलाकर, ये प्रोजेक्ट्स शहरवासियों की जिंदगी को सुगम बनाएंगे।

किसानों का भरोसा जीता मुआवजे से

भूमि अधिग्रहण हमेशा विवादों का विषय रहा, लेकिन इस बार किसानों को समय पर पूरा मुआवजा मिल गया। मेरठ में दिल्ली-हापुड़ बाईपास के लिए करोड़ों रुपये सीधे खातों में भेजे गए। गोंडा में 13 करोड़ का बजट आवंटित हुआ, जबकि आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र में 25 करोड़ की परियोजना के लिए पहली किस्त जारी हो चुकी। किसान अब खुश हैं, क्योंकि न सिर्फ पैसे मिले, बल्कि भविष्य में रखरखाव का भी इंतजाम पक्का है। यह कदम विकास प्रोजेक्ट्स को बिना रुकावट आगे बढ़ाने का बेहतरीन उदाहरण है। सरकार ने साबित कर दिया कि किसानों का हित प्राथमिकता है।

प्रमुख शहरों में चल रहे मेगा प्रोजेक्ट्स

आजमगढ़ को 15 किलोमीटर लंबा चार-लेन दक्षिण-पूर्व बाईपास मिल रहा है, जो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इसकी लागत 1279 करोड़ है, जिसमें फ्लाईओवर और सर्विस रोड भी शामिल हैं। जौनपुर में 12.2 किमी का वेस्टर्न बाईपास 944 करोड़ से बनेगा, जो कई राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ेगा। आगरा के बरहन में 4 किमी बाईपास 25 करोड़ की लागत से 18 महीने में तैयार होगा। मेरठ में हापुड़ रोड बाईपास भूमि अधिग्रहण के अंतिम चरण में है। गोंडा के परसपुर में नहर पटरी पर बाईपास से कस्बाई जाम उखड़ जाएगा। ये सभी प्रोजेक्ट्स केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मंजूरी से गति पकड़ चुके हैं।

आर्थिक उछाल और रोजगार के नए द्वार

बाईपास बनने से सिर्फ जाम कम नहीं होगा, बल्कि इलाकों में विकास की लहर दौड़ेगी। निर्माण के दौरान हजारों मजदूरों को काम मिलेगा। व्यापारिक केंद्र शहरों के बाहर शिफ्ट होंगे, जिससे जमीन के दाम बढ़ेंगे। पूर्वांचल के शहरों में उद्योग लगने के नए मौके खुलेंगे। पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि यात्रा समय कम हो जाएगा। सरकार ने रखरखाव के लिए पांच साल का बजट भी तय किया है, ताकि सड़कें लंबे समय तक टिकें। यूपी अब हाईवे क्रांति का केंद्र बन रहा है।

भविष्य की सड़कें

ये बाईपास यूपी के सड़क नेटवर्क को मजबूत करेंगे। शहरों की भीड़ कम होगी, हादसे घटेंगे और ईंधन बचत होगी। टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी होने से काम जोरों पर शुरू हो जाएगा। किसानों का सहयोग और सरकार की प्रतिबद्धता इसकी सफलता की कुंजी है। आने वाले दिनों में यूपी के यात्री जाम की मार से आजाद होकर तेज रफ्तार का मजा लेंगे। यह बदलाव न सिर्फ आज की पीढ़ी, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए फायदेमंद साबित होगा। राज्य सरकार का विजन साफ है- कनेक्टेड यूपी, प्रोस्पेरस यूपी।

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info@gurukulbharti.in

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