ग्रामीण भारत की लाखों महिलाओं के लिए केंद्र सरकार की लखपति दीदी योजना एक बड़ा मौका लेकर आई है। यह पहल स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बिना ब्याज के पांच लाख रुपये तक का व्यवसायिक ऋण उपलब्ध करा रही है। इससे वे अपना छोटा कारोबार शुरू कर सकेंगी और सालाना एक लाख रुपये से अधिक की कमाई कर लखपति बन सकेंगी। हाल ही में पेश हुए केंद्रीय बजट में इस योजना को और विस्तार दिया गया है, जिसमें महिलाओं के उत्पाद बेचने के लिए विशेष बाजार केंद्र भी शामिल हैं।

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योजना का लक्ष्य और महत्व
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय सदस्यों को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि वे डेयरी, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण या सिलाई जैसे कामों में हाथ आजमा सकें। सरकार पूरी ब्याज की जिम्मेदारी खुद लेती है, जिससे महिलाओं पर कोई वित्तीय बोझ न पड़े। इसके साथ ही मुफ्त कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। पंजाब जैसे राज्यों में यह योजना कृषि आधारित उद्यमों को नई गति दे रही है, खासकर लुधियाना क्षेत्र में जहां महिलाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अब तक करोड़ों महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं और 2026 तक तीन करोड़ का लक्ष्य है।
कौन बन सकती हैं पात्र?
योजना का लाभ लेने के लिए महिला की उम्र अठारह से पचास वर्ष के बीच होनी चाहिए। वह किसी मान्यता प्राप्त स्वयं सहायता समूह की कम से कम दो वर्ष पुरानी सदस्य हो। परिवार की सालाना आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए और सरकारी नौकरी न हो। चयन समूह के नेतृत्व और स्थानीय अधिकारियों द्वारा किया जाता है। लखपति दीदी कार्ड योजना के तहत जारी एक विशेष प्रमाण पत्र है, जो ऋण स्वीकृति और प्रशिक्षण तक पहुंच सुनिश्चित करता है। यह कार्ड बैंक खाते से सीधे लेन-देन की सुविधा देता है।
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आवेदन कैसे करें?
आवेदन की प्रक्रिया को सरल रखा गया है। सबसे पहले नजदीकी स्वयं सहायता समूह से जुड़ें। फिर ग्राम पंचायत, ब्लॉक विकास कार्यालय या बैंक में जाकर फॉर्म भरें। आधार कार्ड, बैंक पासबुक, आय प्रमाण पत्र, पता प्रमाण और समूह सदस्यता का प्रमाण जमा करना होता है। एक साधारण व्यवसाय योजना भी तैयार रखें। स्वीकृति मिलने पर पंद्रह से तीस दिनों में राशि खाते में आ जाती है। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी रजिस्ट्रेशन संभव है, जो ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
नए अपडेट और लाभ
बजट 2026 में शी मार्ट की घोषणा हुई है, जो हर जिले में महिलाओं द्वारा संचालित खुदरा केंद्र होंगे। यहां वे अपने तैयार माल को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकेंगी। इसके अलावा पंद्रह हजार से बीस हजार का घूमता कोष, डेढ़ लाख तक की ब्याज सहायता और पांच हजार का अतिरिक्त ओवरड्राफ्ट भी मिलता है। ये सुविधाएं महिलाओं को बाजार से जोड़ती हैं और कारोबार को स्थायी बनाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दहाई अंकों की वृद्धि होगी।
सफलता की कहानियां
लुधियाना की रीना जैसी कई महिलाएं इस योजना से प्रेरित हो रही हैं। दो लाख के ऋण से डेयरी शुरू करने वाली रीना अब हर माह बीस हजार कमाती हैं। ऐसी कहानियां पूरे देश में फैल रही हैं, जो साबित करती हैं कि छोटा कदम बड़ी सफलता ला सकता है। हालांकि जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं लाभ उठा सकें। फर्जी वेबसाइटों से बचें और आधिकारिक चैनलों पर ही भरोसा करें। यह योजना न केवल आर्थिक स्वतंत्रता देगी, बल्कि समाज को नई दिशा भी। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय समूह या पंचायत से संपर्क करें।
















