Join Youtube

Bamboo Farming: बांस की खेती बनी ‘हरा सोना’! ₹60,000 की सब्सिडी और 40 साल तक कमाई; nbm.nic.in पर आवेदन शुरू।

क्या आप जानते हैं? छोटी सी जमीन पर बांस लगाओ, 3 साल में लाखों कमाओ। सरकार दे रही भारी सब्सिडी, आवेदन आज से शुरू! बिहार के किसानो का सुनहरा मौका, जल्दी उठाओ वरना हाथ से निकलेगा।

Published On:

बांस की खेती अब किसानों की आय का स्थायी स्रोत बन रही है। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत बिहार सरकार 60,000 रुपये तक की सब्सिडी दे रही है, और nbm.nic.in पर आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कम लागत में 40 साल तक लगातार कमाई का यह अवसर छोटे-बड़े सभी किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

Bamboo Farming: बांस की खेती बनी 'हरा सोना'! ₹60,000 की सब्सिडी और 40 साल तक कमाई; nbm.nic.in पर आवेदन शुरू।

क्यों है बांस ‘हरा सोना’?

बांस को ‘हरा सोना’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह कम पानी और कम रखरखाव में उगता है। बाजार में फर्नीचर, कागज, हस्तशिल्प और निर्माण सामग्री के लिए इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। एक हेक्टेयर में 1000 पौधे लगाने की कुल लागत लगभग एक लाख रुपये है, जिसमें 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलने के बाद किसान का बोझ बहुत कम रह जाता है। तीन से पांच साल बाद कटाई शुरू हो जाती है, जो सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक की कमाई दे सकती है। यहां तक कि खेत की मेढ़ पर मात्र 10 पौधे लगाकर भी 40 साल तक नियमित आय सुनिश्चित की जा सकती है।

पर्यावरण और आर्थिक लाभ

बांस की खेती पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। यह मिट्टी कटाव रोकता है, 33 प्रतिशत अधिक कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है और प्राकृतिक खाद का उत्पादन करता है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों जैसे बिहार में यह आदर्श विकल्प है। राष्ट्रीय बांस मिशन ने अब तक 60,000 हेक्टेयर गैर-वानिकी भूमि पर रोपण को बढ़ावा दिया है। इसमें उपचार इकाइयां, प्रसंस्करण यूनिट और बाजार सुविधाएं शामिल हैं। ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बंजर जमीनों पर भी 50 साल तक पैदावार मिल सकती है, जो किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी।

आवेदन कैसे करें?

आवेदन प्रक्रिया बेहद सरल है। nbm.nic.in वेबसाइट पर ऑनलाइन फॉर्म भरें। आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज अपलोड करें। जिला कृषि कार्यालय सत्यापन करेगा और सब्सिडी सीधे बैंक खाते में जमा हो जाएगी। पूर्वोत्तर राज्यों में सफल इस मॉडल को बिहार में तेजी से अपनाया जा रहा है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गुणवत्ता वाले बीज चुनें और स्थानीय कृषि कार्यालय से प्रशिक्षण अवश्य लें।

सरकारी समर्थन और भविष्य

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बांस को आर्थिक क्रांति का माध्यम बताया है। यह न केवल रोजगार बढ़ाएगा, बल्कि शहरों की ओर पलायन भी रोकेगा। जलवायु परिवर्तन के दौर में बांस सतत खेती का बेहतरीन विकल्प है। बिहार के किसान बांस से न सिर्फ आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।

Author
info@gurukulbharti.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार