भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। बाजार में चर्चा जोरों पर है कि अब बिना आधार कार्ड के कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाएगा। वास्तविकता यह है कि यह बदलाव चुनिंदा समय के लिए लागू है, जो दलालों और फर्जी बुकिंग पर अंकुश लगाने का प्रयास है। लाखों दैनिक यात्रियों को इसका सीधा असर पड़ रहा है, खासकर त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में।

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बदलाव की असली वजह क्या है?
एडवांस रिजर्वेशन पीरियड का पहला दिन, यानी यात्रा से ठीक 60 दिन पहले सुबह खुलने वाली बुकिंग, अब सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक केवल आधार से सत्यापित खातों के लिए सीमित है। इस दौरान गैर-सत्यापित उपयोगकर्ता इंतजार ही कर सकते हैं। अगले दिन या उसके बाद सामान्य बुकिंग संभव है, बशर्ते सीटें उपलब्ध रहें। तत्काल कोटे में भी आधार आधारित ओटीपी अनिवार्य हो चुका है, जो पहले से चरणबद्ध रूप से चल रहा है। काउंटर से टिकट खरीदने या जूनियर बुकिंग पर अभी कोई पाबंदी नहीं लगी।
यह कदम रेलवे की लंबी मुहिम का हिस्सा है। पहले केवल पहले 15 मिनट में सत्यापन जरूरी था। धीरे-धीरे समय बढ़ा और अब पूरा पहला दिन कवर हो गया। इसका मकसद साफ है: बॉट्स और मल्टीपल अकाउंट्स से होने वाली अवैध बुकिंग रोकना। नतीजतन, सामान्य यात्रियों को बेहतर मौका मिल रहा है। कई ट्रेनों में कन्फर्मेशन दर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
क्यों जरूरी था यह कदम?
रेलवे का अनुमान है कि ओपनिंग डे पर ही अधिकांश सीटें ब्लॉक हो जाती थीं। दलाल बड़े पैमाने पर फर्जी आईडी से टिकट हड़प लेते थे, जिससे असली मुसाफिरों को नुकसान होता। नया सिस्टम पारदर्शिता लाता है। ग्रामीण इलाकों में जहां आधार लिंकिंग की चुनौतियां हैं, वहां शुरुआती असुविधा हो सकती है। फिर भी, डिजिटल इंडिया के दौर में यह अपरिहार्य बदलाव माना जा रहा है। सीनियर नागरिक और कम डिजिटल साक्षरता वाले लोगों के लिए चुनौती अधिक है।
सत्यापन प्रक्रिया सरल बनाएं
आईआरसीटीसी ऐप या वेबसाइट पर लॉग इन करें। प्रोफाइल सेक्शन में आधार प्रमाणीकरण का विकल्प चुनें। नंबर डालें और लिंक्ड मोबाइल पर आए ओटीपी से पुष्टि करें। पूरा काम कुछ मिनटों में हो जाता है। अगर आधार उपलब्ध न हो, तो वैकल्पिक दस्तावेज जैसे पैन या वोटर आईडी से केवाईसी पूरा किया जा सकता है। काउंटर बुकिंग में अभी ओटीपी ही पर्याप्त है। हेल्पलाइन नंबर 139 पर संपर्क करें अगर कोई समस्या हो।
यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?
देशभर में करोड़ों यात्री रोज रेल पर निर्भर हैं। अनुमानित 40 प्रतिशत खाते अभी सत्यापित नहीं हैं। अमृतसर जैसे रेल हब शहरों में छोटे व्यापारी और परिवार प्रभावित हो सकते हैं। लंबी दूरी की यात्राओं में घबराहट बढ़ेगी। सकारात्मक पक्ष यह है कि ब्लैक मार्केटिंग कम होगी। यात्रियों के एक अनौपचारिक सर्वे में बहुमत ने इसका समर्थन किया। रेलवे ऐप के नए वर्जन से बुकिंग आसान हो रही है।
आगे की राह
यात्रियों को सलाह है कि अभी सत्यापन पूरा कर लें। नेक्स्ट जेन ई-टिकटिंग सिस्टम अपनाएं। वेबसाइट पर नियमित अपडेट देखें। यह बदलाव निष्पक्ष यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में मजबूत कदम है। वायरल संदेशों से सावधान रहें, आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें। रेलवे यात्रा अब अधिक सुरक्षित और समावेशी बनेगी।
















