
बजट का सीजन आते ही हर कोई अपने टैक्स स्लैब और डिडक्शन की गिनती करने लगता है। इस बार खासतौर पर अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (AMCHAM) जैसी संस्थाओं ने सरकार से गुजारिश की है कि सेक्शन 80C के तहत डिडक्शन लिमिट को 2.5 लाख रुपये कर दिया जाए। 2014 से ये लिमिट वही 1.5 लाख पर अटकी हुई है, जबकि महंगाई ने सबकी जेब काट ली है।
अगर ये होता है, तो पुरानी टैक्स रीजीम चुनने वाले लाखों लोग खुश हो जाएंगे। सोचिए, आपकी सैलरी पर टैक्स का बोझ कम हो जाए और पैसे बचत में लग जाएं – ये तो सपना जैसा लगता है ना?
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अभी डिडक्शन की सीमा क्या कहती है?
साफ-साफ बात करें तो इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C में सालाना 1.5 लाख तक का निवेश या खर्चा दिखाकर आप टैक्स बचा सकते हैं। ये सिर्फ पुरानी रीजीम में लागू होता है, नई रीजीम वाले भूल जाइए। लेकिन अच्छी बात ये कि ऑप्शंस ढेर सारे हैं – PPF में पैसा डालो, ELSS म्यूचुअल फंड्स में लगाओ, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम भरो, या बच्चों की ट्यूशन फीस (दो तक) क्लेम करो।
होम लोन का प्रिंसिपल रीपेमेंट भी इसी में आ जाता है। मिडिल क्लास परिवार इनमें से कुछ न कुछ चुनकर अपना फ्यूचर सिक्योर करते हैं। लेकिन 1.5 लाख की कैप से कई बार लगता है कि बस हो गया, और बाकी पैसे पर टैक्स चढ़ ही जाता है।
सेक्शन 80C के पॉपुलर निवेश विकल्प
चलिए, एक-एक करके देखते हैं कि कहां-कहां पैसा लगाकर टैक्स बचा सकते हैं। PPF सबसे सेफ है – 15 साल लॉक-इन, अच्छा ब्याज, और बच्चों को ट्रांसफर भी कर सकते हो। ELSS फंड्स मार्केट से जुड़े हैं, थोड़ा रिस्क लेकिन रिटर्न भी ज्यादा। सूक्ष्म बचत योजना (NSC), 5 साल FD, या पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट भी लिस्ट में हैं। अगर घर खरीदा है तो प्रिंसिपल अमाउंट यहां क्लेम हो जाता है।
ट्यूशन फीस पर भी राहत मिलती है, जो पेरेंट्स के लिए वरदान है। ये सब मिलाकर 1.5 लाख की लिमिट पूरी करने में मजा आता है, लेकिन बढ़ती इनकम के साथ ये कम पड़ रही है। एक्सपर्ट्स कहते हैं, समय आ गया है इसे अपडेट करने का।
लिमिट बढ़ने से क्या फायदा होगा?
अगर लिमिट 2.5 लाख हो गई, तो सेविंग कल्चर को जबरदस्त बूस्ट मिलेगा। मिडिल क्लास वाले अभी भी पुरानी रीजीम पसंद करते हैं क्योंकि ये डिडक्शन उन्हें कंट्रोल फील कराते हैं। PPF या ELSS में ज्यादा निवेश से रिटायरमेंट फंड मोटा हो जाएगा। परिवारों की फाइनेंशियल प्लानिंग मजबूत होगी, और टैक्स का बोझ कम होने से जेब में ज्यादा पैसे रहेंगे। AMCHAM का तर्क साफ है – इनकम बढ़ी है, महंगाई भी, तो डिडक्शन क्यों पीछे रहे? इससे इकॉनमी को भी फायदा, क्योंकि लोग ज्यादा इनवेस्ट करेंगे।
नई vs पुरानी रीजीम कौन सी बेहतर?
वित्त मंत्री ने 2020 में नई रीजीम लॉन्च की थी – कम टैक्स स्लैब, लेकिन डिडक्शन जीरो। धीरे-धीरे इसे आकर्षक बनाया गया – स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 किया, 12 लाख तक इनकम टैक्स-फ्री कर दी। अब ये डिफॉल्ट है। लेकिन पुरानी रीजीम वालों को सालों से कोई बड़ा तोहफा नहीं मिला। अगर 80C लिमिट बढ़ी, तो बैलेंस हो जाएगा। नई रीजीम कम इनकम वालों के लिए ठीक, लेकिन हाई इनकम वाले डिडक्शन मिस करते हैं। आपकी चॉइस क्या है? बजट के बाद तय करेंगे।
किसानों और मिडिल क्लास की अन्य उम्मीदें
बजट सिर्फ टैक्स नहीं, किसान सम्मान निधि को 6,000 से 8,000 रुपये करने की भी बात चल रही है। स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ सकता है, टैक्स-फ्री लिमिट 5 लाख तक जा सकती है। सुपर रिच पर ज्यादा टैक्स या कैपिटल गेंस नियम आसान करने की मांगें भी हैं। कुल मिलाकर, ग्रामीण से शहर तक सबकी नजरें बनी हुई हैं।
















