
इंसान दिखने में बाकी प्रिमेट्स (Primates) जैसे चिम्पांजी या गोरिल्ला से काफी अलग हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि हमारे चेहरे का एक छोटा सा हिस्सा ‘ठोड़ी’ (Chin) हमें पूरी दुनिया के जीवों से अलग बनाता है? हालिया शोधों ने इस गुत्थी को सुलझा लिया है कि आखिर यह हड्डी सिर्फ ‘होमो सेपियन्स’ यानी आधुनिक इंसानों के पास ही क्यों है।
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इंसानों की अनोखी पहचान
वैज्ञानिक दृष्टि से, ठोड़ी जबड़े के नीचे निकली हुई वह हड्डी है जिसे ‘मेंटल प्रॉमिनेंस’ कहा जाता है, चौंकाने वाली बात यह है कि हमारे सबसे करीबी पूर्वज निएंडरथल और डेनिसोवन के पास भी यह नहीं थी; उनके चेहरे का निचला हिस्सा सीधा या पीछे की ओर ढलुआं होता था।
कैसे बनी यह हड्डी? वैज्ञानिकों की नई थ्योरी
सालों तक यह माना जाता रहा कि बोलने या खाना चबाने के दौरान जबड़े को मजबूती देने के लिए ठोड़ी विकसित हुई हालांकि, PLOS One जर्नल में प्रकाशित ताज़ा अध्ययन के अनुसार, ठोड़ी का विकास किसी खास काम के लिए नहीं, बल्कि एक ‘इवोल्यूशनरी एक्सीडेंट’ या Spandrel (उप-उत्पाद) के रुप में हुआ है।
वैज्ञानिकों के अनुसार इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- जैसे-जैसे इंसानों ने खाना पकाकर खाना शुरू किया, उनके दांत और जबड़े छोटे होते गए। चेहरे के ऊपरी और मध्य हिस्से के पीछे खिसकने से जबड़े का निचला हिस्सा अपने आप बाहर की ओर दिखने लगा।
- शोधकर्ता नोरीन वॉन क्रैमोन-टौबडेल के अनुसार, यह हड्डी सीधे चयन (Natural Selection) का परिणाम नहीं है, बल्कि खोपड़ी के अन्य हिस्सों में हुए बदलावों का एक साइड-इफेक्ट है।
- जब इंसानी चेहरा लगभग 15% तक छोटा हुआ, तो जबड़े की हड्डियों के तालमेल ने स्वाभाविक रुप से इस उभार को जन्म दिया।
चिम्पांजी के पास क्यों नहीं है ठोड़ी?
चिम्पांजी और अन्य बंदरों के जबड़े बाहर की ओर निकले होते हैं और उनके दांत काफी बड़े होते हैं, उनके जबड़े की हड्डी अंदर की ओर मुड़ जाती है, जिसे ‘सिमियन शेल्फ’ कहा जाता है यही कारण है कि उनके पास वह नुकीली ठोड़ी नहीं होती जो इंसानों की पहचान है।
















