
जहाँ आज का युवा बड़े शहरों की चकाचौंध और भारी-भरकम सैलरी के पीछे भाग रहा है, वहीं छतरपुर के देवी प्रसाद शुक्ला ने एक अलग ही रास्ता चुना, नोएडा की एक गारमेंट फैक्ट्री में दो साल की नौकरी के दौरान उन्होंने न केवल सिलाई सीखी, बल्कि व्यापार की बारिकियों को भी समझा, लेकिन उनके मन में हमेशा अपने गांव के लिए कुछ करने की टीस थी।
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शुरुआत: ₹80,000 की पूंजी और एक छोटा कमरा
देवी प्रसाद ने अपनी जमा-पूंजी से मात्र ₹80,000 निवेश कर घर के एक छोटे से कमरे में सिलाई मशीन लगाई, शुरुआती दौर में उन्होंने खुद लोअर और टी-शर्ट सिलना शुरू किया, गुणवत्ता अच्छी होने के कारण स्थानीय बाजारों में उनके उत्पाद हाथों-हाथ बिकने लगे।
आज की तस्वीर: लाखों का मुनाफा और खुद का प्लांट
आज देवी प्रसाद ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर एक बड़ी गारमेंट फैक्ट्री का निर्माण कर लिया है।
- मशीनीकरण: उन्होंने करीब ₹7 लाख की आधुनिक मशीनें लगाई हैं, जिससे उत्पादन की गति कई गुना बढ़ गई है।
- उत्पाद रेंज: उनकी फैक्ट्री में बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए फैशनेबल लोअर और गारमेंट्स तैयार किए जाते हैं।
- रोजगार का जरिया: सबसे खास बात यह है कि उन्होंने गांव के 10 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें अपनी फैक्ट्री में नौकरी दी है, जिससे उन युवाओं का शहर की ओर पलायन रुक गया है।
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देवी प्रसाद शुक्ला कहते हैं, “बिजनेस शुरू करने के लिए शहर जाना जरूरी नहीं है, बस आपके पास हुनर और अपने इलाके की जरूरतों की समझ होनी चाहिए।”
















