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19 या 20 मार्च? जानें गुड़ी पड़वा की सही तारीख और शुभ मुहूर्त; इस समय पूजा करने से घर में आएगी सुख-समृद्धि

पंचांग विवाद ने उलझन बढ़ाई! ज्योतिषी खोलेंगे सही तारीख का राज, शुभ मुहूर्त बताएंगे। घर में धन-लक्ष्मी लाने वाली पूजा विधि सीखें, वरना साल भर पछताएंगे। अभी पढ़ें, भूल न जाएं!

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हिंदू नववर्ष की धूमशाला गुड़ी पड़वा इस बार विवादों में घिर गई है। लोग पूछ रहे हैं क्या यह 19 मार्च को धूम मचाएगा या 20 मार्च को? ज्योतिष गणना बताती है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह सवा छह बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह सवा चार बजे तक चलेगी। सूर्योदय के समय तिथि सक्रिय होने से ज्यादातर पंचांग 19 मार्च को ही मुख्य दिन घोषित करते हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में इसे गुड़ी पड़वा कहते हैं, तो दक्षिण के राज्यों में उगादी के नाम से जाना जाता है। विक्रम संवत 2083 की शुरुआत इसी दिन हो रही है, जो चैत्र नवरात्रि का भी आगाज है।

19 या 20 मार्च? जानें गुड़ी पड़वा की सही तारीख और शुभ मुहूर्त; इस समय पूजा करने से घर में आएगी सुख-समृद्धि

विवाद क्यों? पंचांगों की भिन्नता

हर साल तारीखों को लेकर थोड़ा भ्रम रहता है, लेकिन इस बार खास तौर पर चर्चा जोरों पर है। कुछ पुराने पंचांग 20 मार्च की ओर इशारा करते हैं, जबकि आधुनिक गणना उदय तिथि के आधार पर 19 मार्च को सही ठहराती है। ज्योतिषी सलाह देते हैं कि स्थानीय परंपरा और अपने कुल पंचांग का ध्यान रखें। फिर भी, अधिकांश परिवार 19 मार्च को ही गुड़ी सजाएंगे, क्योंकि तिथि का प्रारंभ उसी दिन होता है। यह दिन नई ऊर्जा और विजय का प्रतीक है, जो ब्रह्मा जी की सृष्टि रचना और राम की रावण पर जीत से जुड़ा माना जाता है।

शुभ मुहूर्त

पूजा के लिए सबसे अच्छा समय अभिजित मुहूर्त है, जो 19 मार्च को दोपहर करीब बारह बजे आएगा। सुबह स्नान के बाद से दोपहर तक का दौर गुड़ी स्थापना के लिए बिल्कुल सही रहता है। इस दौरान की पूजा से घर में सुख-शांति और धनलक्ष्मी का वास होता है। प्रातःकालीन समय भी शुभ माना जाता है, जब सूर्य की पहली किरणें घर को रोशन करती हैं।

पूजा विधि

सुबह उठकर अभ्यंग स्नान करें। घर को लीप-पोतकर स्वच्छ बनाएं और मुख्य द्वार पर रंगोली सजाएं। बांस की चौकड़ी पर पीला कपड़ा बांधें, उसमें नीम पत्ता, फूल, गुड़ और हल्दी की माला लगाकर गुड़ी तैयार करें। इसे दाहिनी ओर लटकाएं। माता दुर्गा, कुलदेवता और नवग्रहों का पूजन करें। आरती उतारें, तिलक लगाएं। प्रसाद में पुरण पोली या उगादी पाचड़ी बनाएं। दक्षिण भारत में पंचकूटा सब्जी का विशेष महत्व है। दान-पुण्य करें, नए कपड़े पहनें।

खास महत्व और उत्सव की रौनक

यह पर्व नई शुरुआत का संदेश देता है। बाजारों में रंग-बिरंगी गुड़ियां सज रही हैं। बच्चे झूले झूलेंगे, घर फूलों से महकेंगे। मौसम साफ रहने की उम्मीद है, जो उत्सव को और मजेदार बनाएगा। इस दिन नामकरण या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य करना फलदायी होता है। परिवार के साथ मिलकर मनाएं, तो साल भर सुख समृद्धि बनी रहेगी। गुड़ी पड़वा की बधाई!

Author
info@gurukulbharti.in

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