भारत के बाजारों में सोने-चांदी की चमक फीकी पड़ गई है। हाल के दिनों में सोने के दाम 10 ग्राम पर करीब ₹13,000 तक लुढ़क चुके हैं, जबकि चांदी प्रति किलो ₹27,000 से ज्यादा सस्ती हो गई। इस सस्ते अवसर पर खरीदारों की होड़ लग गई है, हर तरफ ज्वेलरी शॉप्स पर भीड़ दिख रही है। लोग इसे निवेश का सुनहरा मौका मान रहे हैं।

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क्यों लुढ़कीं कीमतें इतना नीचे?
सोने-चांदी की कीमतों में यह भारी गिरावट वैश्विक आर्थिक हलचलों से उपजी है। अमेरिकी डॉलर की अचानक मजबूती और वहां ब्याज दरों में संभावित बदलावों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। जनवरी के आखिर में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद महज 48 घंटों में सोना 18 फीसदी तक गिर गया, जो दशकों की सबसे तेज दुर्घटना जैसी लगी। चांदी तो 25 फीसदी से ज्यादा धसक गई, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया। इसके अलावा, बजट 2026 की घोषणाओं से पहले आयात शुल्कों पर सस्पेंस ने घरेलू भावों को और दबाव में डाल दिया। ट्रेडर्स प्रॉफिट बुकिंग में जुटे रहे, जिससे सप्लाई बढ़ी और डिमांड घटी।
अभी क्या हैं मौजूदा भाव?
फरवरी की शुरुआत में दिल्ली-मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर 1,47,000 रुपये के आसपास स्थिर हो गया है, जबकि कुछ हफ्ते पहले यह 1,60,000 के पार था। 22 कैरेट सोना भी 1,47,200 रुपये पर उपलब्ध है, जो ज्वेलरी खरीदारों के लिए राहत भरा है। चांदी के मामले में प्रति किलो भाव 2,74,000 रुपये तक पहुंच चुका है, जो पीक से 27,000 रुपये से अधिक की छूट दर्शाता है। ये भाव शहरों के बीच थोड़े अलग-अलग हैं, लेकिन कुल मिलाकर सौदा शानदार है। खासकर शादी-त्योहारों के सीजन में स्टॉक करने वालों के लिए यह सुनहरा मौका साबित हो रहा है।
खरीदारी का सिलसिला क्यों तेज?
कीमतों के इस धड़ाम से बाजार में जबरदस्त खरीदारी का दौर चल पड़ा है। ज्वेलर्स पुराने स्टॉक को तेजी से बिक्री में बदल रहे हैं, क्योंकि प्रीमियम बढ़ गए हैं। आम आदमी से लेकर बड़े निवेशक तक ‘डिप खरीदो’ के मंत्र पर चल रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि में सोना-चांदी महंगाई के खिलाफ मजबूत हथियार बने रहेंगे। खासकर चांदी, जो इंडस्ट्री में सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए इस्तेमाल होती है, उसके फ्यूचर चमकदार दिख रहे हैं। बाजार में भीड़ उमड़ने से लोकल मंडियों में चमक बरकरार है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों की नजरें बजट घोषणाओं पर टिकी हैं, जहां आयात ड्यूटी में बदलाव से भावों को नई दिशा मिल सकती है। अभी सोने का सपोर्ट लेवल 1,40,000 रुपये और चांदी का 2,50,000 के आसपास मजबूत है। निवेशकों को सलाह है कि एकमुश्त न खरीदें, बल्कि धीरे-धीरे स्टेप्स लें। पोर्टफोलियो का 5-10 फीसदी हिस्सा इन धातुओं में रखना समझदारी होगी। अगर वैश्विक तनाव कम होते हैं, तो और गिरावट संभव है, लेकिन त्योहारी डिमांड भावों को सहारा देगी। कुल मिलाकर, यह गिरावट निवेशकों के लिए बड़ा अवसर लेकर आई है। सतर्क रहें, सही समय पर खरीदें और भविष्य को सुरक्षित बनाएं।
















