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EWS Reservation Protest: दिल्ली में EWS वालों का महा धरना क्यों? मांग और बड़े ऐलान की पूरी रिपोर्ट

EWS वालों का गुस्सा फूटा। आरक्षण खत्म करने की साजिश क्यों? मांगें क्या हैं और अब अगला बड़ा ऐलान। पूरी सच्चाई जानिए, वरना पछताएंगे।

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जंतर-मंतर की सड़कें आज EWS आरक्षण के समर्थकों से गूंज रही हैं। हजारों युवा और संगठन एकजुट होकर सरकार से मांग कर रहे हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग को नौकरियों और शिक्षा में उम्र छूट मिले। यह महाधरना पिछले साल के प्रदर्शनों को नई ताकत दे रहा है, जहां EWS कोटे की कमजोरियों पर सवाल उठे थे। प्रदर्शनकारी बैनर लेकर नारे लगा रहे हैं कि बिना छूट के 10 प्रतिशत कोटा सिर्फ कागजों पर रह गया है।

EWS Reservation Protest: दिल्ली में EWS वालों का महा धरना क्यों? मांग और बड़े ऐलान की पूरी रिपोर्ट

उम्र सीमा भेदभाव, अवसर क्यों छिन जाते हैं?

EWS उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग की तरह 32 से 35 साल की उम्र सीमा झेलनी पड़ती है। आरक्षित श्रेणियों को तीन से दस साल की छूट मिलती है, लेकिन आर्थिक पिछड़ेपन पर यह सुविधा नहीं। युवा कहते हैं कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे यूपीएससी में वे पिछड़ जाते हैं। जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शनकारी ने कहा, हम गरीब हैं, लेकिन जाति से आगे हैं, फिर भी न्याय नहीं मिल रहा। 2019 के संशोधन से मिला कोटा शिक्षा और नौकरियों तक ठीक है, लेकिन पंचायत चुनावों में इसकी कमी से गुस्सा भड़का। राजस्थान जैसे राज्यों का मॉडल यहां लागू करने की बात हो रही है।

मांगों की पूरी सूची

प्रदर्शन का केंद्र बिंदु स्पष्ट मांगें हैं। पहली, ओबीसी और एससी-एसटी जैसी उम्र छूट लागू हो। दूसरी, EWS के लिए अलग राष्ट्रीय आयोग बने जो कोटे की निगरानी करे। तीसरी, 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कोटा हो, खासकर स्थानीय निकाय चुनावों में। इसके अलावा सर्टिफिकेट की वैधता एक साल से बढ़ाकर तीन साल की जाए और आय गणना में जमीन-मकान को न जोड़ा जाए। संगठन नेता चेताते हैं कि ये बदलाव न आएं तो देशव्यापी हड़ताल होगी। यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को मजबूत करने का प्रयास है, जहां कोटे को मान्यता मिली थी।

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राजनीति समर्थन और विरोध

विपक्षी दल कांग्रेस और आप ने प्रदर्शन का साथ दिया है। वे बीजेपी पर गरीब विरोधी नीतियों का इल्जाम लगा रहे हैं। खासकर दिल्ली में सर्टिफिकेट जारी करने पर लगी रोक से स्कूल दाखिले प्रभावित हुए, जिसने आग में घी डाला। सत्ताधारी पक्ष चुप्पी साधे है, लेकिन आंतरिक चर्चा तेज है। प्रदर्शन में महिलाएं और किसान परिवारों के लोग भी शामिल हैं, जो बताता है कि यह सिर्फ युवाओं का मुद्दा नहीं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां नेता बड़े ऐलान की तैयारी बता रहे।

आगे की राह

धरना शांतिपूर्ण चल रहा है, लेकिन संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का प्लान बनाया है। अगर मांगें न मानी गईं तो हड़ताल और कोर्ट की दिशा में कदम बढ़ेंगे। हाल ही में दिल्ली स्कूलों में EWS दाखिले शुरू हुए हैं, लेकिन नौकरियों पर असर डालना लक्ष्य है। EWS आबादी करीब 25 प्रतिशत सवर्णों को कवर करती है, इसलिए इसका सामाजिक न्याय पर असर पड़ेगा। यह लड़ाई संविधान के सपनों को पूरा करने का दावा कर रही है। प्रदर्शनकारियों का जोश देखकर लगता है कि सरकार को जल्द फैसला लेना पड़ेगा।

EWS Reservation Protest
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info@gurukulbharti.in

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