बिहार सरकार ने जमीन के रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब पूर्वजों की जमीन को वारिसों के नाम दर्ज कराना बेहद आसान हो गया है। पुरानी जटिलताओं को दूर कर सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है। इससे लाखों परिवारों को फायदा होगा।

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डिजिटल जमाबंदी का नया दौर
लंबे समय से किसान और जमीन मालिक जमाबंदी के नामांतरण में परेशान थे। राजस्व दफ्तरों के चक्कर और कागजी घमासान आम बात थी। लेकिन अब सब कुछ ऑनलाइन हो गया है। एक ही आवेदन से सभी भाइयों-बहनों के नाम पर अलग-अलग रिकॉर्ड बन जाएंगे। बंटवारे का झगड़ा भी कम होगा। यह बदलाव भूमि प्रबंधन को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण इलाकों में इससे नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।
आवेदन की सरल प्रक्रिया
सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। जमीन का खाता और खेसरा नंबर डालें। वारिसों का विवरण भरें। दस्तावेज अपलोड कर आवेदन जमा करें। कुछ ही दिनों में सत्यापन हो जाएगा। एक सदस्य पूरा काम कर सकता है। स्टेटस भी ऑनलाइन चेक करें। मोबाइल ऐप से यह और सुविधाजनक है। पुरानी जमाबंदी में गलती हो तो सुधार का अलग विकल्प उपलब्ध है।
जरूरी कागजात
आवेदन के लिए वंशावली का प्रमाण दें। आधार कार्ड अनिवार्य है। पुरानी लगान रसीद या मृत्यु प्रमाण-पत्र संलग्न करें। बंटवारे की सहमति पत्र भी काम आएगा। सभी दस्तावेज स्कैन फॉर्मेट में अपलोड करें। साफ-सुथरी फोटो जरूर लगाएं। इनके बिना आवेदन अधूरा माना जाएगा। सही जानकारी से प्रक्रिया तेजी से पूरी होती है।
आम लोगों को क्या फायदा
सही जमाबंदी से बैंक लोन लेना आसान हो गया। सरकारी योजनाओं का लाभ बिना अड़चन मिलेगा। फसल बीमा और सब्सिडी अब दरवाजे पर। पारिवारिक कलह कम होगा। लाखों आवेदन पहले ही सफल हो चुके। इससे भूमि विवाद कोर्ट पहुंचने से पहले सुलझ जाएंगे। डिजिटलीकरण से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। किसान समुदाय में खुशी की लहर है।
चुनौतियां और समाधान
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी एक समस्या है। लेकिन सरकार जागरूकता अभियान चला रही। पंचायत स्तर पर सहायता केंद्र खोले गए। ट्रेनिंग कैंप भी हो रहे। जल्द ही हर गांव में मदद उपलब्ध होगी। तकनीकी साक्षरता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा। इससे सभी को फायदा मिलेगा।
आगे की राह
नए नियमों से रजिस्ट्री प्रक्रिया भी सरल होगी। स्टांप ड्यूटी में राहत की संभावना। भू-मापी और लगान भुगतान सब ऑनलाइन। डिजिटल बिहार का सपना साकार हो रहा। मुख्यमंत्री ने इसे किसानों की जीत बताया। संगठनों ने स्वागत किया। लेकिन कनेक्टिविटी सुधार की मांग उठी। कुल मिलाकर यह सुधार राज्य की प्रगति का प्रतीक बनेगा। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक साइट देखें।
















